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Jhajjar-Bahadurgarh News: सात जिलों के ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने मांगों को लेकर भरी हुंकार

Mon, 10 Jul 2023 01:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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सात जिलों के ग्रामीण सफाई कर्मचारी मांगों को लेकर सड़क पर रोष प्रदर्शन करते हुए। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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झज्जर। शहर की अनाज मंडी में प्रदेश के सात जिलों के ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने मांगों को लेकर हुंकार भरी। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में पहुंचे सफाई कर्मचारियों ने राव तुलाराम चौक तक पैदल मार्च किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा।
ये हैं कर्मचारियों की मांगें
सफाई कर्मचारियों यूनियन के नेताओं ने बताया कि स्थायी नौकरी और न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक वेतन, बीडीपीओ के पैरोल पर लेने, 400 की आबादी पर एक कर्मचारी लगाने, वेतन को महंगाई के साथ जोड़ने, सहमति अनुसार काम के औजार, ब्लॉक का वार्षिक भत्ता देने, धुलाई भत्ता भुगतान करने एवं वेतन बढ़ोतरी के साथ वार्षिक बढ़ोतरी का लाभ देने आदि मांगों को लेकर रविवार को झज्जर, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, रोहतक, भिवानी गुरुग्राम के ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने झज्जर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे 16 जुलाई को सीएम सिटी करनाल में प्रदर्शन करेंगे।
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बारिश के बीच किया प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने नई अनाज मंडी में सभा की और उसके बाद बारिश के बीच ही प्रदर्शन शुरू किया। जिला प्रशासन की ओर से ड्यूटी मजिस्ट्रेट और भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के सचिव नरेंद्र सिंह जाखड़ को ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर प्रदर्शन को सीटू राज्य महासचिव जयभगवान, यूनियन राज्य महासचिव विनोद कुमार, कोषाध्यक्ष संदीप सिंह, राज्य उपाध्यक्ष पूनम, सीटू जिला सचिव किरण, ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के भिवानी-दादरी के सचिव सुरेश कुमार, झज्जर के प्रधान नरेश व उपप्रधान सुनील, रेवाड़ी के प्रधान राजकुमार, महेंद्रगढ़ से नेता कृष्ण कुमार व बसंत, रोहतक के प्रधान दिलेर व कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद्र व शीला देवी, गुरुग्राम के प्रधान रामबीर के अलावा मिड डे मील वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सरोज दुजाना और आशा वर्कर्स यूनियन की उपाध्यक्ष प्रवेश आदि ने संबोधित किया।
नेताओं ने कहा कि सरकार ग्रामीण सफाई कर्मियों के साथ दोगला व्यवहार कर रही है। 2014 में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले कच्चे सफाई कर्मियों को 81 सौ रुपये वेतन मिलता था, लेकिन आज ग्रामीण सफाई कर्मियों और शहरी कर्मियों के वेतन में जमीन-आसमान का फर्क हो चुका है।
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औजार ही नहीं होंगे तो कर्मचारी काम कैसे करेंगे
उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री वोट लेने के लिए सफाईकर्मियों के पांव धोते हैं, कोरोना काल में फूल बरसाए जाते हैं, लेकिन नौकरी कच्ची ही रखी जा रही। आए दिन स्वच्छता का नारा देने वाली सरकार ग्रामीण सफाई कर्मियों को कस्सी, तसला, फावड़ा, झाड़ू, बेलचा, आदि काम के औजार और स्वास्थ्य सुरक्षा के उपकरण नहीं दे रही। जब औजार ही नहीं होंगे तो कर्मचारी काम कैसे करेंगे।
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