झज्जर। सामान्य अस्पताल में स्थित आयुष विभाग के पंचकर्म केंद्र पर मरीजों का तांता लग रहा है। केंद्र में केरल पद्धति से मरीजों की थेरेपी, मसाज, डाइट चार्ट बनाकर मरीजों की जीवन शक्ति को बढ़ाने का काम किया जा रहा है। कोरोना काल के बाद लोगों का आयुर्वेदिक दवाओं की ओर रुझान बढ़ा है। पंचकर्म केंद्र में सुबह से थेरेपी के अलावा शिरोधारा, वमन, विरेचन, वस्ती, नस्य कर्म इत्यादि विधियों द्वारा इलाज किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन 70 से 80 मरीज आ रहे हैं।
आयुष विभाग की विशेषज्ञ व चिकित्सक डॉ. ज्योति ने बताया कि कोरोना काल के बाद लोगों ने अपनी मूल प्राचीन पद्धति आयुर्वेद को अपनाकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। पंचकर्म सेंटर पर आयुष विभाग की ओर से चलाए गए सेंटर पर लोगों को उनके खानपान के बारे में पूछ कर उन्हें उनके आहार से ही औषधि बताई जा रही है। इसका लाभ उन्हें मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मधुमेह मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, भूलने की बीमारी और अन्य कई बीमारियों से ग्रसित लोग आ रहे हैं। इनका थेरेपी कर व काउसिंलिंग के माध्यम से व रोगी को उसके आहार से ही औषधि बनाकर उनका स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा है। आयुष विभाग की ओर से चलाई गई थेरेपी से सैकड़ों की संख्या में मरीजों को आराम मिल रहा है।
डॉ. ज्योति ने बताया कि शिरोधारा एक पंचकर्म प्राचीन आयुर्वेदिक थेरेपी है, जो कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ प्रदान करती है। इस चिकित्सीय उपचार में माथे या तीसरी आंख क्षेत्र पर धीरे से गर्म तेल या हर्बल काढ़े की एक निरंतर धारा शामिल होती है। यह शरीर और दिमाग पर गहरे आराम और कायाकल्प प्रभाव के लिए जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि शिरोधारा थेरेपी सदियों से पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का एक अभिन्न अंग रही है। इसका उद्देश्य केवल लक्षणों का इलाज करने के बजाय बीमारियों के मूल कारण को संबोधित करके शरीर के भीतर संतुलन और सद्भाव बहाल करना है। आमतौर पर तिल का तेल, नारियल तेल और हर्बल-युक्त तेल का उपयोग किया जाता है। दोष असंतुलन के आधार पर, चिकित्सीय प्रभाव को बढ़ाने के लिए विशिष्ट जड़ी-बूटियों को जोड़ा जा सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति में तीन दोषों का एक अद्वितीय संयोजन होता है। वात, वायु और आकाश के तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है, पित्त अग्नि और जल का प्रतिनिधित्व करता है। कफ जल और पृथ्वी का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें से किसी भी दोष में असंतुलन शरीर के संतुलन को बाधित कर सकता है। परिणामस्वरूप विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।