झज्जर। धान रोपाई वाला क्षेत्र न होने के बाद भी झज्जर जिले के किसान करीब एक लाख एकड़ भूमि में धान की रोपाई करते हैं। अगर धान की खेती होती रही तो आने वाले करीब दस साल में एक लाख एकड़ से अधिक भूमि बंजर होने के कगार पर पहुंच जाएगी।
वर्ष 1995 में में जब बाढ़ आई तो उससे पहले जिले में धान की रोपाई नहीं होती थी। बाढ़ के बाद जिले में किसान धीरे-धीरे धान की रोपाई करने लगे। पिछले 27 साल में हालात ये पैदा हो गए कि करीब एक लाख 88 हजार एकड़ भूमि का जल स्तर दस फुट से ऊपर आ चुका है। निरंतर धान की रोपाई होती रही तो दस साल में भूमि कर जल स्तर और ऊपर आ जाएगा। इससे यह भूमि कृषि योग्य नहीं बचेगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ाें के मुताबिक जिले की करीब एक लाख 12 हजार एकड़ भूमि का भूमिगत जलस्तर 0 से 5 फुट तक है। 66 हजार कृषि योग्य भूमि का जल स्तर 10 फुट तक है और 9200 एकड़ भूमि का जल स्तर पूरी तरह से ऊपर है और इसमें पानी भरा रहता है।
- भूमिगत जल निकास प्रणाली से किया जाएगा समाधान
भूमिगत जल निकास प्रणाली के तहत साल्ट (खारा) युक्त पानी निकालकर ड्रेन में डालने से तीन साल में साल्ट डेढ़ से तीन मीटर तक जमीन के अंदर चले जाते हैं और उसके ऊपर के साल्ट भूमि से खत्म हो जाते हैं और जमीन दोबारा से उपजाऊ हो जाती है। इस विधि के अनुसार भूमि में लगभग एक मीटर नीचे 10-15 सेंटीमीटर व्यास के छिद्र युक्त लोहे या सीमेंट-कंक्रीट के पाइप दबाए जाते हैं। इन पाइपों को मुख्य पाइप लाइन से जोड़कर उस पानी को सैंप (होद)तक पहुंचाया जाता है। वहां सोलर पंप सेट से उस पानी को ड्रेन में छोड़ा जाता है। जिससे भूमि का जल स्तर नीचे चला जाता है और साल्ट युक्त पानी बाहर निकाल दिया जाता है। बारिश का पानी जब जमीन में जाता है भूमि के जल में सुधरा हो जाता है।
इन गांवों को किया है योजना में शमिल
झज्जर जिले के डीघल गांव की 3 हजार एकड़, बिठला व बिसहान गांव की करीब 500 एकड़ भूमि का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। खरहर गांव भूजल स्तर सुधार की इस परियोजना पर लगभग 301 लाख रुपये की लागत आएगी और छह महीने में परियोजना पूरी होने पर गांव की लगभग 1050 एकड़ जमीन के भूजल स्तर में सुधार होगा। परियोजना के तहत सोलर एनर्जी आधारित साढ़े सात एचपी मोटर के 21 सबमर्सिबल मोटर पंपिंग सेट लगाए जा रहे हैं। इन 21 पंप सेटों से जमीन के अंदर से पानी निकाल कर मातन लिंक ड्रेन में डाला जाएगा। इससे भूजल स्तर नीचे जाएगा । खेती की जमीन में सुधार होगा। जबकि धौड़ गांव में 35 बोरिंग लगा कर ड्रेन में पानी को डाला जाएगा। जिससे करीब 998 एकड़ भूमि को सुधारा जाएगा।
- वर्जन
धान की खेती जितनी जल्दी छोड़ेंगे उतना ही भूमिगत जल स्तर में सुधार होगा और भूमि कृषि योग्य होगी। सरकार तो एक-एक एकड़ भूमि को सुधारने पर काम कर रही है।
- डॉ ईश्वर जाखड़, तकनीकी अधिकारी, कल्याण विभाग, झज्जर।