साल्हावास। पेरिस ओलंपिक 2024 में देश को कांस्य पदक दिलाने वाले बिरोहड़ के अमन सहरावत मंगलवार को देश में लाैट आए। गांव के लाल का स्वागत करने के लिए परिजनों के अलावा गांव और आसपास से बड़ी संख्या में ग्रामीण दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे। अब उनके गांव में पहुंचने पर बड़े सम्मान समारोह के आयोजन की तैयारी चल रही है।
रोहड़ गांव से लगभग बीस गाड़ियों के काफिले को लेकर दादा मांगेराम, ताऊ सुधीर, भाई राकेश, बिंटू, सरपंच प्रतिनिधि रवींद्र सहरावत, दादी अणची, मौसी सुमन आदि सुबह छह बजे ही दिल्ली चले गए थे। इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर पहुंचने पर सभी ने अमन का स्वागत किया।अमन सहरावत के साथ उनके कोच सतपाल महाबली भी रहे। अमन सहरावत भारत को छठा मेडल दिलवाने वाले भारतीय ओलंपिक खिलाड़ी बने हैं।
आसान नहीं था पेरिस ओलंपिक तक का सफर
इस जीत के पीछे का सफर अमन सहरावत के लिए आसान नहीं था। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था।दरअसल अमन की मां का हार्टअटैक से तब निधन हुआ था, जब वह महज 10 साल के ही थे। वहीं एक साल के अंदर उनके पिता की भी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद मौसी और दादा दादी सहित ताऊ ने देखभाल की।
दादा सहित अन्य परिजनों ने निभाई अहम भूमिका
बता दें कि माता-पिता को खो देने के बाद अमन सहरावत को काफी बड़ा झटका लगा। यहां तक की वह डिप्रेशन में चले गए थे। उनकी बहन और अमन को उनकी मौसी और दादा सहित अन्य परिजनों ने उनकी देखभाल की है। जब धीरे-धीरे अमन ठीक होने लगे तो उन्होंने कुश्ती में अपना जौहर दिखाना शुरू कर दिया।
पिता के निधन के बाद भी कुश्ती का जुनून
अमन सहरावत का अमन सहरावत ने बिरोहड़ के गाधणी धाम से कुश्ती की शुरुआत की थी। उनके पहले कोच व गुरु भुरू पहलवान रहे हैं। पिता के निधन के बाद भी कुश्ती का अपना जुनून जारी रखा। साल 2021 में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय चैंपियनशिप खिताब जीतकर सुर्खियां बटौरी थी। इसके बाद फिर उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना नहीं पड़ा। साल 2022 के एशियन गेम्स में 57 किलोग्राम वर्ग में ब्रांज मेडल जीता। फिर साल 2023 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया। जनवरी 2024 में उन्होंने जागरेब ओपन कुश्ती टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।