बादली। भारतीय ज्योतिषशास्त्र के आधार पर दाम्पत्य जीवन में सुख प्राप्ति के लिए गुण मिलान की आवश्यकता होती है। भावी वर वधु के जीवन में सुख शांति, स्मृद्धि एवं उन्नति के लिए गुणों का मिलान आवश्यक है। एक दूसरे के ग्रहों के मिलान के साथ अष्टकूट मिलान भी किया जाता है।
पंडित अमित कौशिक के अनुसार अष्टकूट मिलान को वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भृकूट और नाड़ी को जाता है। इन्हीं आठ गुणों के मिलान के पश्चात ही ज्योतिषिय आधार पर पूर्ण मिलान मान्य है। इस अष्टकूट मिलान के पूर्ण रूप से ज्ञान होना अति आवश्यक है। तभी एक दूसरे के बारे में मान सकते हैं। अमित ने गुणों के मिलान में बताया कि आठ कूटों को प्रभाव हमारे जीवन में अलग प्रकार से होता है। वर्ण मिलान में गुण, स्वभाव और कर्म के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है और वश्य मिला में एक दूसरे के स्वभाव एवं वशीभूत का ज्ञान, तारा मिलान से कार्य क्षेत्र में उन्नति, धन पैसे के ज्ञान, योनि विचार में शारीरिक संबंध, तृप्ति का ज्ञान, गृह मैत्री से प्रीति, प्रेम का ज्ञान, गण मिलान से सामाजिक प्रतिष्ठा, भृकुट मिलान से जीवन शैली का ज्ञान और नाड़ी मिलान से स्वास्थ्य संबंधी, दिनचर्या और हानि लाभ का ज्ञान होता है। इस प्रकार से ही जीवन में उन्नति, सुख, शांति, संतान वृद्धि एवं आध्यात्म का लाभ मिलता है।