झज्जर। दिल्ली गेट स्थित रामलीला ग्राउंड पर श्री प्राचीन रामलीला कमेटी के मंच पर रविवार को राम वनवास की लीला का मंचन किया गया। इसमें मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने दमदार अभिनय करते हुए दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। राम के वनगमन के दृश्य को देखकर सभी की आंखें भर आई।
मंच पर कलाकारों ने दिखाया कि राम विवाह के बाद राजा दशरथ अपने बेटे राम को गद्दी सौंपना चाहते थे। इसके लिए अयोध्या में तैयारी शुरू हो जाती हैं। सब लोग खुशी मनाते हैं और राम की तीनों माताएं भी खुश हैं। तभी रानी केकई के पास उनकी दासी मंथरा पहुंचती है और श्रीराम के खिलाफ उनके कान भर देती है। वह कहती है कि यदि राम को सिंहासन मिल गया तो वह दासी बनकर रह जाएगी। इसलिए राजा दशरथ से राम के लिए 14 साल का वनवास मांगे। इसके बाद केकई राजा दशरथ के पास जाती है और राम के लिए 14 साल का वनवास और अपने बेटे भरत के लिए अयोध्या का सिंहासन मांगती है। यह सुनकर राजा दशरथ व्यथित हो जाते हैं, लेकिन केकई अपने वचन को पूरा करवाने के लिए अड़ी रहती है। इसके बाद श्रीराम अपने पिता के पास पहुंचते हैं और माता के वचन को पूरा करने की बात कहते हैं। इसके बाद राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन के लिए रवाना हो जाते हैं। यह दृश्य देखकर रामलीला देखने आए लोगों के भी आंखों में आंसू आ गए। इसके बाद केवट का दृश्य दिखाया जाता है, जो श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को अपने नाव में नदी पार करवाते हैं।