झज्जर। दक्षिणी हरियाणा की जीवन रेखा कही जाने जवाहर लाल नेहरू कैनाल में अब 3251 क्यूसिक नहीं बल्कि 3541 क्यूसिक पानी बहेगा क्योंकि सिंचाई विभाग की तरफ से नहर की 290 क्यूसिक पानी की क्षमता बढ़ा दी गई है। सिंचाई विभाग की तरफ से अब इसे सीसी से तैयार किया गया है। इस परियोजना पर विभाग की तरफ से करीब 301 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस योजना का लाभ प्रदेश के आठ जिलों के लोगों को मिलेगा।
सरकार ने इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2017 में मंजूरी दी थी। उसके बाद करीब 93 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। कहीं कोई छोटा काम बचा हुआ है तो उसको 31 मई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद नहर में बढ़ाई गई क्षमता के अनुसार पानी छोड़ा जाएगा। जिससे सोनीपत, रोहतक, झज्जर, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़-नारनौल, रेवाड़ी, गुरुग्राम जिले के लोगों व किसानी की भूमि की प्यास बुझेगी। हालांकि झज्जर जिले के दोनों थर्मल पावर प्लांटों को भी इस नहर से करीब 300 क्यूसिक पानी की आपूर्ति की जाती है।
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- 45 साल पहले बनी थी कैनाल :
वर्ष 1977-78 में सोनीपत के खुबडू हेड से लेकर रेवाड़ी व नारनौल क्षेत्र तक जवाहर लाल नेहरू कैनाल का निर्माण किया गया था। ताकि दक्षिणी हरियाणा के लोगों की प्यास बुझाई जा सके व किसानों के खेतों की सिंचाई हो सके। नहर के निर्माण के बाद से अब तक कभी भी पूरी नहर की मरम्मत तक नहीं हो पाई थी। अब इसको क्षमता बढ़ाते हुए पूरी तरह से तैयार किया गया है।
अकेहड़ी मदनपुर में है पहला पंप हाउस
जवाहर लाल नेहरू कैनाल खूबडू हैड से निकलने बाद इसका पानी झज्जर जिले के अकेहड़ी मदनपुर गांव तक बहाव के साथ आता है। यहां से करीब 15 फुट पानी को लिफ्ट कर साल्हावास तक पहुंचाया गया है। यहां से नहर दो हिस्सों में विभाजित हो जाती है। साल्हावास पंप हाउस से एक नहर नारनौल- महेंद्रगढ़ व दूसरी रेवाड़ी व गुरुग्राम के कुछ हिस्सों से होकर गुजरती है। इसके अलावा बेरी के पास स्थित बाकरा हेड से लौहारू फीडर निकलती है। जो भिवानी व चरखी दादरी जिलों में पानी पहुंचाती है।
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वर्जन :
जेएलएन कैनाल की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सीमेंट व कंकरीट से तैयार किया गया है। इसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। नाम मात्र का कोई काम बचा है तो उसको भी 31 मई तक पूरा कर लिया जाएगा।
- सतीश कुमार जनावा, एसई, सिंचाई विभाग, झज्जर।