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Jhajjar-Bahadurgarh News: शिवरात्रि पर गंगाजल से भोलेनाथ का किया जलाभिषेक

Sat, 03 Aug 2024 03:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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झज्जर। शिवरात्रि पर बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। डीजे पर भोले भंडारी के भजनों पर थिरकते हुए कांवड़िये शहर और गांव में पंहुचे। शहर में शिवालयों पर सबसे पहले डाक कांवड़ चढ़ाई गई। सुबह से ही गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की।
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शहर के सिद्ध बाबा प्रसाद गिरि मंदिर, बूढ़ा महादेव मंदिर, चौरासी घंटे वाला मंदिर, बाबा कांशीगिरि मंदिर, चौपटा बाजार शिव मंदिर, बाबा खाटू श्याम मंदिर, देवालय मंदिर, डाबरा मंदिर, श्री गोपाल मंदिर, श्री लेखराज मंदिर, श्रीदुर्गा मंदिर, श्रीराम मंदिर, अखंड ज्योति मंदिर, आर्य नगर शिव मंदिर, सुभाष नगर शिव मंदिर, बेरी गेट शिव मंदिर, रोहतक बाईपास स्थित शिव मंदिर, गाजीकमाल मंदिर आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
भांग, धतूरा, फूल, दूध, घी, शहद व जल से श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। सिद्ध बाबा कांशीगिरि मंदिर के पुजारी पवन कौशिक ने बताया कि सावन की शिवरात्रि पर व्रत करने के साथ-साथ मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है।
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हर-हर महादेव के जयघोष वातावरण भक्तिमय
साल्हावास। क्षेत्र में शिवरात्रि धूमधाम से मनाई गई। श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के जयकारों के साथ खानपुर खुर्द स्थित प्राचीन शिवमंदिर, बाघोत और लिलोढ के प्राचीन मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। चारों ओर बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया। शुक्रवार को सबसे अधिक डाक कांवड़ियों का आवागमन हुआ। झाड़ली से लेकर बाघोत तक हर जगह कांवड़ियों का जत्था दिखाई दिया।

वहीं गांव खानपुर खुर्द में बना शिव मंदिर लगभग 104 साल पुराना बताया जा रहा है। यह मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे शिवालय में हर रोज पूजा, अर्चना करते हैं। वहीं बाघोत मंदिर और शिवलिंग अपने अंदर इतिहास, पौराणिक महत्व समेटे हुए है। हजारों की श्रद्धालु गोमुख, गंगोत्री और हरिद्वार से कांवड लाकर बाघोत स्थित स्वयंभू शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते हैं। पुजारी कैलाश के अनुसार बाघोत का मंदिर करीब 1680 वर्ष पुराना है। भगवान श्रीराम के पूर्वजों ने भी यहां तप किया था।

इंसेट
मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया

बेरी। शिवरात्रि पर धर्मनगरी छोटी काशी बेरी में भोले बाबा के जयंकारों से गूंज उठा। रात के बारह बजे के बाद मंदिरों में जल चढ़ाने वालों की होड़ लग गई। बेरी में लगभग छोटे-बड़े 108 मंदिर है, लेकिन बड़ा महादेव के मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं का कहना था कि बेरी के माता भीमेश्वरी देवी मंदिर की तरह बड़ा महादेव महाभारत काल के समय से हैं। बड़ा महादेव, बेरी के पंचमुखी, ईमली वाला मंदिर, देवी मंदिर, बालाजी मंदिर, शिव चौक पर शिव मंदिर, नवदेसर मंदिर, छोटा महादेव में भी श्रद्धालुओं ने पूजा, अर्चना की।
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