पंचायत चुनाव के चलते हर गांव में पंच, सरपंच के उम्मीदवार को लेकर बैठकों में चर्चाओं का सिलसिला लगातार जारी है। वहीं उम्मीदवार ने लोगों को अपने पक्ष में वोट कराने के जनसंपर्क की गतिविधियां काफी हद बढ़ा दी है। डाबौदा कलां गांव में करीब 3200 लोग रहते है। इस बार चुनाव में करीब 1800 मतदाता अपना मतदान कर सकेंगे। इस गांव में सरपंच पद के लिए महिला उम्मीदवार की सीट आरक्षित हुई है।
गांव में चुनावी चर्चाओं में महिलाएं खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रही है। महिलाएं अपनी सुविधाओं को देखते हुए गांव में सबसे पहले साफ सफाई की मांग कर रही हैं। गांव में एक बैंक शाखा भी होनी चाहिए जिसके चलते बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन संबंधित परेशानी का सामना न करना पड़े। शिक्षा के नजरिए से देखते हुए गांव में वाईफाई की सुविधा की भी मांग की जा रही है। लड़कियों के प्रशिक्षण के लिए गांव में सिलाई सेंटर से लेकर अन्य रोजगार के साधनों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी महिलाओं की मांग है। महिला सीट आरक्षित होने पर हर वर्ग की महिलाएं अपनी समस्या गांव के सरपंच के सामने बखूबी रख पाएगी। वहीं उसके समाधान का एक तरीका भी जल्द निकल सकेगा।
महिलाओं की प्रतिक्रिया
- गांव में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर होने चाहिए। उन्हें अलग-अलग स्तर के गांव में ही प्रशिक्षण मिलने चाहिए ताकि महिलाएं खुद के पैरों पर खड़ी हो सके। महिलओं के विकास कार्य करनी वाली उम्मीदवार को अपना वोट दूंगी।
ऊषा देवी।
-गांव में महिला की सीट आरक्षित होने पर एक खुशी की लहर है। महिलाएं अपनी गांव की समस्या का बखूबी सरपंच के सामने रख पाएगी। जिसके चलते समस्या का समाधान भी जल्द होगा। वहीं पंचायत चुनाव की बैठकों में महिलाएं काफी भागीदारी करने लगी ताकि वह अच्छे उम्मीदवार को चुन सके।
- दिशा।
- गांव की छोटी सरकार बनाने में महिलाएं अपना बखूबी योगदान दे देगी। इस महिलाओं की अपनी सरकार होगी। वह उम्मीदवारों के सामने अपने मुद्दे पुरजोर तरीके से उठा पाएगी। वहीं उसी उम्मीदवार को वोट करूंगी जो महिलाओं की सुविधाओं के लिए अलग-स्तर पर काम करेगी।
-सुनीता।
- सरकार की एक अच्छी पहल है। महिलाओं को सरपंच पद के उम्मीदवार के मौका दिया है। इस बात से काफी हद महिलाओं को लाभ पहुंचेगा। वहीं महिलाएं चुनाव बढ़ चढ़कर भाग ले रही है।
-अनिता देवी।