गांव में जब ज्यादा जनसंख्या के उम्मीदवार की सीट आरक्षित हो जाती है तो चुनाव के मायने ही बदल जाते हैं जिसके चलते ज्यादा उम्मीदवार पंच व सरपंच पद के लिए अपने दावेदारी ठोकने लगते हैं। जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर स्थित करीब 2900 लोगों की जनसंख्या वाले गांव में अभी तक सर्वसम्मति से चुनाव नहीं हुआ है। इस चुनाव में गांव से अबकी बार करीब 1350 वोटर वोट डाल सकेंगे। वही गांव में बैठकों में यह भी चर्चा देखने में सामने आई है कि जिन परिवारों को लोगों ने दूसरे परिवारों के पिछले चुनाव में मदद की थी। वह इस बार अपनी तरफ लोगों का रुझान चाहते हैं। एक बार पंच का चुनाव गांव में सर्वसम्मति से संपन्न हो सकता है लेकिन सरपंच पद के उम्मीदवार के लिए काफी कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ता अपने पिछले दिनों गांव में उनकी ओर से किए हुए कामों को याद दिलवाने में लगे हुए हैं लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जो उम्मीदवार गांव में गंदे पानी निकासी को प्राथमिकता देगा उसे ही वह वोट देंगे। जब तक गांव के मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं होगा तब तक ग्रामीण एक सुखद जीवन नहीं जी सकते हैं।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
जो उम्मीदवार गांव के गंदे पानी की निकासी को प्राथमिकता देगा ,मैं अपना वोट उस उम्मीदवार को दूंगा। गांव में कई जगह पर जलभराव की समस्या बनी हुई है ग्रामीण का स्थायी समाधान चाहते हैं।
-विष्णु।
- गांव में सभी लोगों के लिए एक समान विकास होना चाहिए। एक समान विकास से गांव में भाईचारे की भावना बढ़ती है। गांव में सभी समुदायों से बातचीत कर विकास करने वाले उम्मीदवार को मेरा वोट जाएगा।
-जयप्रकाश।
खेतों में जाने वाले कई रस्ते कच्चे हैं। जिससे किसानों को बारिश के दौरान काफी समस्या आती है। इस बार मेरा वोट किसानों के लिए सुविधा करने वाले उम्मीदवार को जाएगा।
-मुकेश कुमार।
- गांव में कई तरह की समस्या है। जिनका अगर सरपंच चाहे तो जल्द ही समाधान हो सकता है। अपना वोट उस उम्मीदवार को दूंगा जो छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देगा।
-मुकेश।