बहादुरगढ़। नारायणी साहित्य अकादमी के संस्थापक प्रख्यात साहित्यकार प्रो. नामवर सिंह की 99वीं जयंती पर संस्था द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सुरभि स्टूडियो में काव्योत्सव का आयोजन किया गया।
संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुष्पा सिंह बिसेन, संरक्षक डॉ.कुसुम जोशी व कलमवीर विचार मंच के संस्थापक कवि कृष्ण गोपाल विद्यार्थी के सान्निध्य में हुए इस कार्यक्रम का संचालन युवा कवि साहिल सन्यासी ने किया। कवि मंजु माही मुंतजिर ने कहा कि राह पथरीली थी, फिर भी गाम न रुके। जिनसे हम बिछड़े थे, उनके काम न रुके। हमने ही ले रखी थी खामख्वाह सिरदर्दी, जिनके अच्छे दिन थे,उनके जाम न रुके। कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने कहा कि उसकी हर फरमाइश पूरी करता हूं। पांव दबाने से भी नहीं मुकरता हूं, जिसने मेरी खातिर अपना घर छोड़ा, कहीं मुझे भी छोड़ न दे,मैं डरता हूं। कुमार राघव ने कहा कि बरगद वाली छांव हमारे हिस्से है। पहिए ना पर पांव हमारे हिस्से है। तुम इतराओ गगन तुम्हारे हिस्से है, हम तो खुश हैं गांव हमारे हिस्से है। साहिल सन्यासी ने कहा कि गम के मौसम जब भी छाने लगते हैं। पंछी घरौंदा छोड़ के जाने लगते हैं। दिल में रखकर देखा है कई लोगों को, दांव लगे तो जिस्म को खाने लगते हैं। तरुण तरंग ने कहा कि मिलावट के फूलों की, जय हिफाजत हम नहीं करते। शायरी करते हैं लेकिन, सियासत हम नहीं करते। कार्यक्रम के दौरान अकादमी के पदाधिकारियों डॉ. पुष्पा सिंह बिसेन, मौहम्मद इलियास, अरुण त्रिवेदी व जनार्दन ने अपनी रचनाओं के अलावा प्रोफेसर नामवर सिंह के व्यक्तित्व व कृतित्व से जुड़े अनेक प्रेरक संस्मरण भी सुनाए।