बहादुरगढ़। कलमवीर विचार मंच द्वारा मित्रता दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें हरियाणा, दिल्ली, यूपी सहित कई राज्यों के कवियों ने काव्य पाठ से मित्रता का महत्व बताया।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता जनकपुरी दिल्ली निवासी नवीन वाही और संचालन कार्यक्रम संयोजक कवि कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने किया। नवीन वाही ने कहा कि सुखदुख में जो साथ निभाए, आपके दुश्मन से भिड़ जाए। हर संकट को दूर भगाए, वही तो सच्चा मीत कहाए सुनाई। नजफगढ़ के मनीष मधुकर ने कहा कि कलियों और फूल, चांद, सितारों की दोस्ती, मौसम, ऋतु, फिजा औ बहारों की दोस्ती।दुनिया में अगर दोस्ती जमती है कहीं तो, जमती है सदा दर्द के मारों की दोस्ती। गाजियाबाद के डॉ. चेतन आनंद ने कहा कि जीवन जैसे गीत है, सांसें हैं संगीत, यह जाना हमने अभी, तुमसे मिलकर मीत। चरखीदादरी की पुष्पलता आर्य ने कविता दोस्ती की बस यही पहचान होती है सखे, एक का तन दूसरे की जान होती है, सखे! मित्र के जब आंसुओं से पांव धोता है कोई, तो अधर पर प्रेम की मुस्कान होती है, सखे! कृष्ण गोपाल विद्यार्थीं ने कहा कि ठोकरें खाती घिसटती जा रही है जिंदगी, जिंदगी पाकर बहुत पछता रही है जिंदगी। दोस्त कुछ ऐसे मिले जो दुश्मनों से कम न थे, आप भी हैं इसलिए कुछ भा रही है जिंदगी। नोएड़ा के राहुल श्रेष्ठ ने कहा कि चेहरे पर चाहे रहे, आंसू या मुस्कान, सच्चे मित्र अगर रहें, फिर दुनिया आसान। मुझको सब स्वीकार है कांटें हो या फूल, क्षमा करें उस मित्र को, हुई हो जिससे भूल। बहादुरगढ़ के वीरेंद्र कौशिक ने कहा कि वही करेगा दोस्ती, जिसका हृदय विशाल। इसमें जाति-धर्म का उठता नहीं सवाल। मित्र वही जो मन को भाए, स्वार्थ जिसे छू भी न पाए। बहादुरगढ़ की सुनीता सिंह ने कहा कि तुम्हारा साथ होता है तो पल कुछ खास होता है, सभी गम भूलकर बस एक सुखद अहसास होता है। ये माना दूर जा बैठे हैं सब अपनी ही दुनिया में,मगर एक-दूजे के दिल में हमारा वास होता है।