बहादुरगढ़। हरियाणा में आधुनिक तकनीक से खेती में जल्द ही ड्रोन शामिल होने वाला है। किसान ड्रोन के माध्यम से अपने खेत में कीटनाशक का स्प्रे कर सकेंगे। उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान हिसार की ओर से युवाओं को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ड्रोन से फसल में जल्द बढ़ोतरी के लिए बूस्टर डोज, नैनो यूरिया का छिड़काव तथा कीटनाशक का स्प्रे करना शामिल होगा।
दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में हिसार स्थित उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान की ओर से भी स्टॉल लगाकर कृषि संबंधी आधुनिक तकनीक और मशीनरी की जानकारी दी जा रही है। कृषि आधारित मशीनरी का परीक्षण और प्रशिक्षण के सबसे बड़े इसी संस्थान में अब ड्रोन कैमरा ट्रेनिंग की शुरूआत होगी। इसका मकसद गांव के युवाओं को ड्रोन की ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने तथा कम समय में अधिक फसल को कवर करना है। संस्थान के तकनीकी सहायक पंकज कुमार ने बताया कि ड्रोन 5 से 6 मिनट में एक एकड़ को कवर कर लेता है। ड्रोन जीपीएस के आधार पर दिए गए मैप के हिसाब से स्प्रे करता है। इसकी बैटरी 15 मिनट तक काम करती है। फिलहाल ड्रोन 5 से 10 फुट ऊपर उड़ाया जाएगा। ताकि कीटनाशक और नैनो यूरिया को फसल तक सही ढ़ंग से पहुंचाया जा सके।
केन्द्र सरकार से ड्रोन प्रशिक्षण की मिली मंजूरी
ड्रोन उड़ाने को लेकर इस संस्थान को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (सिविल एविऐशन) से मंजूरी मिल चुकी है। संस्थान को रेड और येलो जोन को छोड़कर ग्रीन जोन में उड़ान की अनुमति है जोकि जमीन से 120 फीट तक ड्रोन को उड़ाया जा सकता है। संस्थान जल्द ही युवा किसानों को दो सप्ताह की ट्रेनिंग देगा। दो सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा और इसके बाद प्रशिक्षित युवा ड्रोन उड़ा पाएगें। संस्थान की ओर से प्रशिक्षण की फीस 30 हजार रुपये रखी गई है।
ड्रोन से छिड़काव का डेमो रहा सफल
पंकज कुमार ने बताया कि संस्थान ने ड्रोन से छिड़काव को लेकर हिसार और सिरसा के किसानों के बीच डेमो किया है जिसमें नैनो यूरिया का छिड़काव किया गया। सिरसा के शाहपुर बेगू, ओढ़ां, हिसार के सदलपुर व मिर्जापुर में बड़ी संख्या में किसान डेमो को देखने आए। बूस्टर डोज के लिए ड्रोन का प्रयोग आने वाले समय में अधिक रहने की संभावना है।
एक साल में लगभग 6500 युवा ले रहे आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रशिक्षण
यह संस्थान वर्षो से कृषि संबंधित उपकरणों की ट्रेनिंग युवाओं को देता है। साल भर यहां ट्रेनिंग के कार्यक्रम चलते हैं। संस्थान द्वारा एक वर्ष में लगभग 6500 युवाओं को कृषि उपकरणों से संबंधित ट्रेनिंग दी जाती है। पिछले कुछ सालों से फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर भी संस्थान द्वारा ट्रेनिंग दी जा रही है।