बहादुरगढ़। गर्भावस्था में महिलाओं को अपने साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे का पूरा ध्यान देना चाहिए। अकसर महिला इसमें चूक जाती हैं, इससे गर्भवती महिला और बच्चे में बीमारी के लक्षण होने लगते हैं। महिला को उस समय तो कोई परेशानी नहीं होती, परंतु प्रसव के दौरान यह समस्या उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में महिला को खानपान चिकित्सक के परामर्श पर दवाई घर के कुछ काम और योगा आदि पर विशेष ध्यान देने चाहिए। यह जानकारी नागरिक अस्पताल के फिजीशियन डाॅ. सुंदरम ने दी।
डॉ. सुंदरम ने बताया कि अब नवजात कम वजन के साथ पैदा हो रहे हैं। खानपान की कमी के कारण गर्भवती एनिमिया की भी शिकार हो रही हैं। डिलीवरी के बाद बच्चों में वजन 2200 ग्राम से कम मिल रहा है। जबकि औसतन जन्म लेने वाले बच्चे का वजन 2400 ग्राम तक होना चाहिए। 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों महिलाओं में रक्त की कमी हो रही है। 20 प्रतिशत गर्भवतियों का एचबी तो आठ ग्राम से भी कम है। अस्पताल में आए दिन 15 से 20 गर्भवती महिलाएं रक्त की कमी की आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा रक्त की कमी मिली रही है। प्रेग्नेंसी का समय मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए काफी मुश्किलों भरा होता है। इस दौरान मां को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना होता है ताकि शरीर में किसी तरह की कोई कमी न हो। प्रेग्नेंसी के दौरान सेहत से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें भी आ सकती हैं। हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाए जाने वाला प्रोटीन है, जो ब्लड में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इसका सही स्तर पर रहना बहुत जरूरी होता है। प्रेग्नेंसी के वक्त आपके शरीर में ब्लड की मात्रा 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, इसलिए आपको अपनी अतिरिक्त ब्लड की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए और प्रेग्नेंसी के दौरान अपने हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने के लिए खानपान व योग आवश्यक करना चाहिए। अच्छा खानपान ना लेने की वजह से गर्भवती महिला को एनीमिया भी हो सकता है।
प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन के स्तर को कैसे बढ़ाएं
विटामिन-सी लें, अनार, संतरे जैसे विटामिन-सी से भरपूर ताजे फल खाएं
ड्राई फ्रूट्स खाएं, खजूर, अंजीर, किशमिश और बादाम को डाइट में शामिल करें
दाल डाइट में शामिल करें
फोलिक एसिड से भरपूर सब्जियां शलजम, अंकुरित अनाज, एवोकाडो, भिंडी का प्रयोग करें