बादली। आसपास के क्षेत्र में इस बार खरबूजे की खेती करने वाले किसानों के वारे-न्यारे हैं। इस बार खरबूजों का जहां अच्छा भाव मिला है, वहीं खेती भी लंबे समय तक चली है। बरसात न होने से इस फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। आमतौर पर खरबूजे की खेती बरसात के बाद खराब हो जाती है।
जून का दूसरा पखवाड़ा चल रहा है और ज्येष्ठ की एकादशी भी मंगलवार को मनाई जाएगी। ऐेसे में खरबूजे के भाव आसमान पर है। आमतौर पर एकादशी के बाद खरबूजे की खेती लगभग समाप्त हो जाती है। इस बार भीषण गमी के चलते खरबूजे की खेती करने वाले किसानों की बल्ले है और किसानों को खेत में अच्छा फल भी मिल रहा है। गंगड़वा, लुकसर, बूपनिया, बादली, गुभाना, लगरपुर और माजरी क्षेत्र के गांव जिले की सबसे बड़ी खरबूजा मंडी के रूप में माना जाता है। जहां सरकारी आकड़ों के अनुसार 550 एकड़ जमीन पर खरबूजा है। यहां के खेतों में पैदा होने वाला खरबूजा मीठा और स्वादिष्ट है, इससे यहां के खरबूजे की मांग बढ़ती है। बादली मार्ग पर सौलधा से निकलते ही खेतों से खरबूजे की सुगंध लोगों को अपनी तरफ खींच लेती है। इन गांवों की सैंकड़ों एकड़ भूमि में खरबूजा ही खरबूजा दिखाई देता है और भयंकर गर्मी और चिलचिलाती धूप में भी खरबूजे की खेतों में चहल-पहल होती है। ज्यों-ज्यों गर्मी और लू चलती है त्यों त्यों खरबूजे का स्वाद और बढ़ जाता है। बरसात शुुरू होने से पहले खरबूजे की मांग होती है और बरसात शुरू होते ही इसमें मिठास कम होने से इसकी मांग कम हो जाती है।
क्या कहते है किसान
किसान दीपक, सोनू, हरकिशन, प्रदीप और प्रवीन का कहना है कि मंडी में आढ़ती किसान का खरबूजा 8 से 10 से रुपये प्रति किलो खरीदता है और बाजार में वहीं खरबूजा 25 से 35 रुपये तक बिकता है। किसान अपनी खरबूजे की फसल कड़ी धूूप और भयंकर गर्मी में पैदा करता है। खरबूजे की फसल से मिलने वाले पैसा का असली मजा तो आढ़ती और खुदरा व्यापारी ही लेते हैं।