एक स्कूल बस के ड्राइवर को उसी स्कूल के छात्र द्वारा बार-बार जातिसूचक शब्द कहे जाने पर रविवार को बेरी में बवाल हो गया। छात्र द्वारा ड्राइवर को कई बार प्रताड़ित किए जाने पर ड्राइवर ने पुलिस को शिकायत की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उलटा छात्र का ही पक्ष लिया। इसी बात से क्षुब्ध होकर अनुसूचित जाति से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में बेरी पुलिस चौकी पर एकत्रित होकर जमकर बवाल काटा।
चौकी पर बढ़ती लोगों की भीड़ को देख पुलिस को भी अपना रवैया बदलना पड़ा और बाद में बात समझौते पर आकर खत्म हुई। पता चला है कि ड्राइवर को जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित करने वाला छात्र नाबालिग है, वहीं जिस ड्राइवर को प्रताड़ित किया जा रहा था, वह भी उच्च शिक्षित है।
छात्र द्वारा ड्राइवर को प्रताड़ित किए जाने का यह सिलसिला पिछले कई दिनों से जारी था लेकिन जब शनिवार को इसी बात पर जब दोनों के बीच बात हाथापाई तक पहुंची, तब ड्राइवर को पुलिस की शरण लेनी पड़ी।
बेरी के गांव माजरा निवासी अनिल एक निजी स्कूल में बस ड्राइवर है। उसी बस में स्कूल का एक छात्र प्रतिदिन स्कूल के लिए जाता है। पिछले कई दिनों से छात्र अनिल को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर प्रताड़ित कर रहा था।
अनिल ने छात्र को कई बार इसके लिए मना भी किया, लेकिन शनिवार को भी जब छात्र द्वारा जातिसूचक शब्द कहे गए तो बस में ही बात हाथापाई तक पहुंच गई। ऐसे मे ड्राइवर अनिल स्कूल बस को सीधा बेरी थाने में लेकर पहुंचा और पुलिसकर्मियों को पूरा मामला बताया। अनिल का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी बात नहीं सुनी और खुद उसे ही थाने में बैठाए रखा। बाद में अनिल को बेरी पुलिस चौकी भेज दिया गया।
अनिल ने पुलिस चौकी से बाहर आकर अनुसूचित जाति से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को इस बारे में जानकारी दी। रविवार को अंबेडकर मिशनरीज, बसपा और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग बेरी चौकी पहुंचे और अनिल के लिए न्याय की मांग की, लेकिन जब पुलिसकर्मियों ने फिर ढुलमुल रवैया दिखाया, तब संस्थाओं के प्रतिनिधि भड़क उठे। बाद में पुलिस ने सकारात्मक रवैया अपनाते हुए दोनों पक्षों की बात को ध्यान से सुना और दोनों में समझौता करवाकर मामले को निपटाया।
छात्र और ड्राइवर के बीच विवाद हो गया था, जिसको लेकर दोनों पक्षों में रविवार को समझौता हो गया। पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
सत्यवीर, चौकी इंचार्ज, बेरी