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डीघल के यश ने पीजीआई में तोड़ा दम, गुस्साए ग्रामीणों ने किया सीएचसी का घेराव

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डीघल - फोटो : bureau
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चार दिन पहले गांव डीघल के पाना मुढ़ाण में रविवार की देर शाम को सेंटर लॉक हुई कार में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहा यश आज पीजीआई में हार गया। यश की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है, क्योंकि यश के यशस्वी होने की कामना पूरा गांव कर रहा था। बुधवार को रोहतक पीजीआई में उपाचाराधीन यश ने सुबह दम तोड़ा। 11 बजे करीब गमगीन माहौल में मासूम यश का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बता दें कि हादसे में दो बच्चों की मौत रविवार को ही दम घुटने से हो गई थी। गांव डीघल में तीन मासूम बच्चों की मौत हो जाने से ग्रामीणों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि यश के अंतिम संस्कार के बाद सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व महिलाएं डीघल सीएचसी में पहुंची।
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नाराज लोगों ने मेन गेट को बंद कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर मुर्दाबाद के नारे लगाए। गुस्साएं ग्रामीणों व महिलाओं का कहना था कि जब कार में दम घुटने के बाद जैसे ही तीनों मासूमों को गांव डीघल की सीएचसी में लाया गया तो सीएचसी में एंबुलेंस खराब खड़ी थी और न ही आक्सीजन का सिलेंडर मिला, नहीं तो उनकी मौत न होती। विभाग की लापरवाही से गांव डीघल में तीन घरों के चिराग बुझ गए। ग्रामीणों ने तीनों मासूमों की मौत का जिम्मेेेदार स्टाफ को ठहराया। ग्रामीणों का कहना था कि अगर समय रहते सीएचसी से एंबुलेंस व आक्सीजन मिल जाती तो तीनों मासूमी की जिंदगी बच सकती थी। सीएचसी का घेराव करने आए ग्रामीण बोले अब तो गांव में इतना बड़ा हादसा हो गया और अब भी विभाग कोई सुविधा नहीं दे रहा है। ग्रामीणों सीएचसी में सुविधाओं करवाने के लिए घेराव किया है।




डीघल सीएचसी के घेराव होने की सूचना मिलने के बाद डीघल चौकी प्रभारी जय भगवान दहिया मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों समझाने की कौशिक की तो ग्रामीण नहीं माने और विभाग के उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की बात को लेकर अड़े रहे बाद में सारे मामले की सूचना विभाग के उच्च अधिकारियों को दी गई और मामले की सूचना मिलते ही बेरी एसडीएम अजय चोपड़ा, सीएमओ श्रीराम सिवाच झज्जर बेरी थाना प्रभारी कुलबीर सिंह, मौके पर पहुंचे। लेकिन ग्रामीणों ने एक बात न मानी, वह अड़े रहे। लोगों ने कहा कि डीघल सीएचसी में र्र्र्र्र्र्कोई भी मरीज आता हैैैैैैैै उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता हैैैै, जबकि डीघल सीएचसी को बनाने करोड़ों रुपये की लागत आई है। पूर्व सैनिक जगत सिंह ने कहा कि गांव डीघल सीएचसी में किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। यहां सिर्फ बिल्डि़ंग को बनाया गया है। अस्पताल में न तो एक्सरे मशीन व लेडीज डॉ., जरनेटर की सुविधा नहीं हैैैैै। एसडीएम अजय चोपड़ा को ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा और जल्द ही सीएचसी में सारी सुविधाएं मुहिया करवाने की बात कही। ग्रामीणों ने एसएमओ के तबादले की मांग रखी और ड्यूटी मे लापरवाही बरतने वाले स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई अमल मे लाने की बात कही एसडीएम अजय चोपड़ा ने ग्रामीणोें से जांच करवाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणाें ने 10 दिन का प्रशासन को समय दिया अगर प्रशासन ठोस कदम नही उठाता तो ग्रामीण आंदोलन तेज कर देंगे जिसका जिम्मेवार स्थानीय प्रशासन होगा।
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यश के पिता हैं सैनिक  
रविवार को कार का सेंटर लॉक हो जाने से यश की हालत गंभीर होने की सूचना परिजनों द्वारा उसके पिता अनुज को दे दी गई थी और मंगलवार को अनुज छुट्टी लेकर गांव लौटा था और लेकिन उसको नहीं पता था कि यश ऐसे दुनिया को से छोड़ कर चला जाएगा।

यकीन के पिता ने अधिकारियों से सामने दुखड़ा रोया
ग्रामीणों द्वारा सुविधाएं न मिलने पर सीएसची का घेराव किया तो मौके पर पहुंचे अधिकारियों के सामने यकीन के पिता चांद सिंह ने अपना दुखड़ा रोया और कहा कि मेरा तो एक यही सहारा था और कई सालों में लड़का हुआ था और अब स्टाफ की लापरवाही के चलते यकीन की मौत हो गई और उन्होंने कहा कि भविष्य में सीएचसी में सभी सुविधाएं होनी चहिए ताकि कोई घटना ना घटे।

स्टाफ ने किया दुर्व्यवहार
यश के दादा शेर सिंह ने बताया कि रविवार देर शाम को जब तीनों बच्चों को लेकर डीघल सीएसची में पहुंचे तो स्टाफ का व्यवहार भी ठीक नहीं था और जब एंबुलेंस मुहैया करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे तो एंबुलेंस ठीक नहीं थी और आक्सीजन का भी अस्पताल में एक ही सिलेंडर था जोकि ठीक नही था रास्ते में ही बंद हो गया था।


कराई जाएगी सारे मामले की जांच : चोपड़ा
गांव डीघल में बुधवार को सीएचसी के घेराव की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम अजय चोपड़ा ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा सारे मामले की जानकारी ले ली गई है और मामले कोताही बरते जाने वाले स्टाफ के लिए नियमानुसार कार्यवाही करने का आश्वसान दिया और झज्जर सीएमओ को दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि मामले में कोताही बरते जाने वाले स्टाफ के लिए विभागीय कार्रवाई की जाए।

क्या कहना है पीजीआई के अधिकारियों का
साढे़ तीन साल के यश का उपचार करीब ढाई दिन किया और हमने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। ऑक्सीजन की कमी के चलते उसके आर्गेन ने काम करना बंद कर दिया था। इतना वक्त वह सिर्फ लाइफ स्पोर्ट यंत्र के जरिए जीवित था।
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- डॉ. कुंदन मित्तल, बाल रोग विशेषज्ञ, पीजीआईएमएस
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