मुख्यमंत्री के उड़नदस्ते ने फर्जीवाड़े से कीमती औद्योगिक भूखंड हथियाए रखकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने मंगलवार को एचएसआईआईडीसी के बहादुरगढ़ ऑफिस के दस्तावेज घंटों तक खंगाले। माना जा रहा है कि इस तरीके से सरकार को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया गया। ये सारा खेल सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत से हुआ।
दरअसल, एचएसआईआईडीसी ने कई साल पहले बहादुरगढ़ में 16 और 17 दो औद्योगिक सेक्टर विकसित किए थे। सेक्टर-16 में फैक्ट्रियों के लिए 245 भूखंड और सेक्टर-17 में 350 भूखंड बनाए गए। देश के पहले फुटवियर पार्क के विकास के लिए सेक्टर-17 में और दूसरे उद्योगों के विकास के लिए सेक्टर-16 में बहुत कम दामों पर प्लॉट बेचे गए। सरकार ने यह शर्त लगा दी कि इन भूखंडों के अलॉटियों को तीन साल के भीतर भवन बनाना होगा और फैक्टरी लगाकर उत्पादन आरंभ करना होगा, अन्यथा एचएसआईआईडीसी प्लॉट को रिज्यूम कर सकती है। इन शर्तों के मुताबिक, उत्पादन आरंभ होने से पहले कोई भी अलॉटी भूखंड को बेच नहीं सकता, लेकिन इनमें से काफी अलॉटियों ने फैक्टरी नहीं लगाई और एचएसआर्ईआईडीसी अधिकारियों से मिलीभगत कर कंप्लीशन और उत्पादन आरंभ होने के सर्टिफिकेट हासिल कर लिए। इसके बाद भूखंडों को कई गुणा दामों में बेच दिया गया। इस सारे खेल में अलॉटियों और अधिकारियों ने अपने तो करोड़ों रुपये के वारे के न्यारे कर लिए। एक अनुमान के मुताबिक, सरकार को 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का चूना लग गया।
मुख्यमंत्री के उड़नदस्ते के तौर पर डीएसपी गजेंद्र सिंह की अगुवाई में बहादुरगढ़ पहुंची एसआईटी ने एचएसआईआईडीसी ऑफिस में मामले की जांच शुरू की। यहां फाइलों को को खंगालने के साथ यह टीम मौके पर जाकर यह भी जांच रही है कि संबंधित भूखंड में फैक्टरी चल रही है या नहीं। एसआईटी में पुलिस इंस्पेक्टर पवन शर्मा और सहायक पुलिस इंस्पेक्टर जोगेंद्र सिंह के अलावा विषय के टेक्निकल एक्सपर्ट भी शामिल हैं। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक कुल 595 भूखंडों में कम से कम 100 भूखंडों के मामले में इस तरीके से फ्रॉड किया गया है। अलॉटियों ने इन प्लॉटों के कंप्लीशन सर्टिफिकेट और प्रोडक्शन सर्टिफिकेट (फैक्टरी आरंभ होने का प्रमाण पत्र) हासिल करने के लिए एचआईआईडीसी को दिए आवेदनों में तमाम तरह के फर्जी बिल लगा दिए। इनमें भवन में लगी निर्माण सामग्री व निर्माण कर्मचारियों के पारिश्रमिक और उसके बाद फैक्टरी के लिए मशीनें खरीदने और कच्चा माल खरीदने आदि के बिल भी शामिल हैं। इस खेल में सरकार को अब तक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लग चुकी है। अग इन भूखंडों में फैक्टरी चलती तो बिक्रीकर, सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी आदि के रूप में सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता।
सस्ते दामों में प्लॉट लेकर कई अलॉटियों ने उन्हें बेचने या अपने पास बनाए रखने का खेल किया। इसके लिए फर्जी बिल लगाकर कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल कर लिए गए। ऐसे भूखंडों में फैक्ट्रियां शुरू न होने से सरकार को भारी नुकसान होता है। मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
-गजेंद्र सिंह, डीएसपी, एसआईटी