हरियाणा के बहादुरगढ़ में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम के दिशा-निर्देश पर कार्य करते हुए एसटीएफ बहादुरगढ़ की एक टीम ने खरखौदा क्षेत्र के नशा मुक्ति केंद्र संचालक की सनसनीखेज हत्या में शामिल पांच हजार रुपये के एक इनामी अंकुर को रेवाड़ी से पकड़ा है। वह पांच महीने से फरार चल रहा था।
एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी अंकुर वासी चमनपुरा रोहतक पांच महीने से गिरफ्तारी से बच रहा था। इस समयावधि के दौरान वह कभी रेवाड़ी, कभी अमृतसर तो कभी देहरादून में छिप कर पुलिस को पसीने छुड़ा रहा था। उन्होंने बताया कि चिट्टे का नशा छुड़वाने के लिए अंकुर के परिजनों ने उसे सितंबर 2022 में इस नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया था।
पुलिस कप्तान वसीम अकरम ने बताया कि इंस्पेक्टर विवेक मलिक की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि अंकुर रेवाड़ी के कन्हैया लाल पोसवाल चौक के पास किसी सर्विस स्टेशन पर काम कर रहा है। सूचना पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ बहादुरगढ़ की टीम ने उस जगह पर छापामारी करके अंकुर को मौके से धर-दबोचा। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे आगामी जांच के लिए खरखौदा पुलिस को सौंप दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि दिसंबर माह में खरखौदा उपमंडल के गांव झिंझौली में दरियाव सिंह नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र संचालक राकेश (40) की दो सहकर्मियों समेत आठ हमलावरों ने डंडों से पीटकर व धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। हमलावरों ने उनके हाथ-पैर बांधकर वारदात को अंजाम दिया। देर रात वारदात को अंजाम देकर हमलावर केंद्र में उपचार करा रहे अन्य युवकों को भी लेकर भाग गए। बाद में वह उन्हें हरेवली मोड़ पर उतर गए।
उपचार करा रहे एक युवक ने मामले से केंद्र संचालक के भाई को अवगत कराया। वह केंद्र में पहुंचे तो उन्हें अपना भाई मृत अवस्था में मिला। पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि इस मामले में खरखौदा पुलिस ने राकेश के भाई की शिकायत पर अंकुर समेत आठ लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इसमें अन्य सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन अंकुर फरार चल रहा था।