थाना शहर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर विशेष कार्यबल के एक थानेदार को करीब एक करोड़ रुपये की हेरोइन और कुछ मात्रा में गांजा अवैध रूप से रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह सब कार्रवाई डीएसपी की मौजूदगी और देखरेख में की गई। आरोपी थानेदार के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। अपने ही विभाग के एक थानेदार के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से एसओजी में हड़कंप मचा रहा।
एसपी जशनदीप सिंह को सूचना मिली थी कि जिला पुलिस के एएसआई सबीस ने एसओजी बहादुरगढ़ में कार्यरत रहते हुए चरखी दादरी के निकट काबू किए एक तस्कर से बहुत कीमती नशीले पदार्थ पकड़े हैं और उचित कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पकड़े गए नशीले पदार्थों को उसने पास रख लिया। इसी आदेश पर शनिवार को हुई कार्रवाई में शहर थाना पुलिस ने सबीस के कब्जे से 650 ग्राम हेरोइन और कुछ मात्रा में गांजा बरामद किया। सबीस को गिरफ्तार कर लिया गया है।
फिलहाल डीघल चौकी में तैनात था सबीस
सूचना मिलने पर एसपी सिंह ने बहादुरगढ़ के डीएसपी धीरज कुमार को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। पुलिस प्रवक्ता चमनलाल के मुताबिक, शनिवार को शहर थाना प्रभारी विष्णु प्रसाद और उनकी टीम को लेकर डीएसपी धीरज बहादुरगढ़ में एसओजी के ऑफिस पहुंचे।
संयोग से आरोपी एएसआई सबीस भी वहीं मिल गया। वह फिलहाल डीघल पुलिस चौकी में तैनात है और शनिवार को संदूक आदि अपना व्यक्तिगत सामान लेने के लिए एसओजी ऑफिस आया था। शहर थाना प्रभारी विष्णु प्रसाद के मुताबिक, मौके पर सबीस की मौजूदगी में ही डीएसपी ने उसके संदूक की तलाशी ली तो उसमें हेरोइन और कुछ गांजा मिला। तोलने पर हेरोइन की मात्रा 650 ग्राम मिली।
शहर थाना पुलिस ने सबीस के खिलाफ शहर थाना बहादुरगढ़ में केस दर्ज कर लिया और उसको गिरफ्तार कर लिया। कल उसे अदालत में पेश किया जाएगा। बरामद की गई हेरोइन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है।
तस्कर से मांगे 10 लाख रुपये
डीएसपी धीरज कुमार की देखरेख में इस मामले में कार्रवाई करने वाली टीम में थाना शहर के एसएचओ एवं निरीक्षक विष्णु प्रसाद, उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह, धर्मबीर, सहायक उप निरीक्षक बलराज, एचसी अजय और पवन शामिल थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सबीस ने तस्कर से 10 लाख रुपये मांगे थे।
तस्कर नहीं दे पाया तो उसका सारा माल कब्जे में ले लिया और उसकी गाड़ी भी खड़ी करा ली। इसकी सूचना मिलने पर एसपी ने तुरंत यह एक्शन लिया। थाना शहर पुलिस की जब तक यह कार्रवाई चली, तब तक एसओजी के मुख्य दरवाजे बंद रहे। किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया और न ही बाहर आने दिया गया।