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बलकरा में पसरा सन्नाटा, शव आने का करते रहे इंतजार

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बलकरा में पसरा सन्नाटा, शव आने का करते रहे इंतजार
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डेरा प्रकरण में जिला प्रशासन ने बलकरा को माना था संवेदनशील गांव, पीजीआई में करवाया गया मृतक सोमबीर का पोस्टमार्टम
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
डेरा अनुयायी सोमबीर का शव कुएं में मिलने और परिजनों के सिरसा डेरा प्रबंधन कमेटी पर दबाव बनाकर संपत्ति हड़पने के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, घटना के बाद से ही गांव बलकरा में सन्नाटा पसरा है। शनिवार सुबह ही लोग सोमबीर के घर के सामने जुटने शुरू हो गए थे। इससे पहले शुक्रवार देर शाम पुलिस ने कुएं में मिले शव को कब्जे में लेकर दादरी के सिविल अस्पताल में रखवा दिया था। ग्रामीणों का अनुमान था कि मंगलवार दोपहर तक सोमबीर का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंच जाएगा। परिजनों की मांग व मामले की गहनता को देखकर जिला पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई बोर्ड से कराने का फैसला लिया। दोपहर बाद सोमबीर का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने मृतक के साले के बयान पर मामले की जांच शुरू कर दी है। जिला पुलिस का कहना है कि सोमबीर की गुमशुदगी का मामला पहले ही थाने में दर्ज है। शनिवार को मृतक के परिजनों ने पुलिस को जो बयान दिए हैं उनके तथ्यों की जांच शुरू की जा चुकी है। जांच में जो भी सामने आएगा उसी अनुरूप सदर थाना में दर्ज मुद्दों की धाराओं में फेरबदल किया जाएगा।
सदर थाना पुलिस को दिए बयान में मृतक के साले हंसराज बूरा ने बताया कि छह अगस्त को उसका जीजा सोमबीर घर से संदिग्ध हालातों में गायब हो गया। पुलिस प्रवक्ता सुरेंद्र दांगी ने बताया कि हंसराज ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि सोमबीर ने गांव के सरपंच प्रतिनिधि सोमबीर के साथ खाना खाया था और इसके बाद घर आकर अपनी पत्नी चित्रा देवी को चाय बनाने के लिए बोला था। हंसराज ने बताया कि चाय पीने के बाद सोमबीर बिना कुछ बताए चला गया और सात सितंबर तक जब वह नहीं लौटा तो गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई गई। हंसराज ने बताया कि उसका भांजा जब आठ सितंबर को सोमबीर को खोजने खेत में पहुंचा। उसके भांजे ने जब खेत में बने कुएं में झांका तो उसमें एक शव दिखाई दिया। इसकी सूचना अन्य ग्रामीणों व पुलिस को भी दी गई। हंसराज ने बताया कि सोमबीर पिछले कई सालों से सिरसा डेरे में जा रहा था। मृतक के साले ने आरोप लगाया कि डेरा प्रमुख की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर उसने अपनी जमीन बेचनी शुरू कर दी। हंसराज ने बताया कि डेरा प्रमुख ने रिजॉर्ट में हिस्सेदारी करने पर हर माह सोमबीर के पांचों बच्चों के खाते में डेढ़ से दो लाख रुपये डलवाने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन बच्चों के अकाउंट में फूटी कौड़ी नहीं आई। पुलिस को दिए बयान में हंसराज ने बताया कि जमीनी बेचने व डेरा प्रमुख में करोड़ों रुपये फंसने से आहत होकर ही सोमबीर ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया है। पुलिस ने बयान दर्ज करने के बाद पीजीआई में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया। वहीं, गांव बलकरा में शनिवार को दिन भरा सन्नाटा रहा। सोमबीर के घर के बाहर सुबह से ही ग्रामीण एकत्र होने लगे। वहीं, दिनभर गांव के लोग डेरा प्रमुख को जबरन वसूली के लिए कोसते नजर आए।
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प्रशासन ने भी बलकरा को माना संवेदनशील गांव
डेरा प्रकरण के दौरान जिला प्रशासन ने बलकरा को भी संवेदनशील गांव माना था। पुलिस प्रशासन के अनुसार बलकरा के अलावा चार अन्य गांवों में डेरा अनुयायियों की संख्या अधिक थीं। इसलिए खुफिया तंत्र को इन गांवों पर विशेष नजर रखने के निर्देश जिला पुलिस कप्तान सुनील दलाल ने दिए थे।
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ग्रामीण बोले: सोमबीर जैसे प्रदेश में लाखों
मृतक सोमबीर के घर के समीप चारपाई डालकर बैठे करीब 10-12 बुजुर्ग तो राम रहीम पर जमकर बरसे। एक बुजुर्ग ने अमर उजाला प्रतिनिधि से बातचीत में हरियाणवी लहजे में कहा कि- सोमबीर का छोरा तो पूरे हरियाणे म्य इसै चार-पांच लाख आदमी बतावै है। इनके रपिये डेरे आल्यै बाबै न्य हड़प लिए। इस दौरान यहां बैठे बुजुर्गों ने बताया कि गांव में काफी अनुयायी ऐसे हैं जो दस से लेकर बीस हजार रुपये का एक टमाटर, मिर्च व नींबू जैसे सामान्य चीजें डेरे से लाए हैं।
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