अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रास्ता रोकने के मामले में आरोपी दो युवकों को झज्जर की एक अदालत ने आरोपमुक्त किया है। अदालत ने गवाहों व साक्ष्यों के अभाव में मारौत निवासी संजय व सोनू को बरी करने का आदेश दिया है। सोनू व संजय के वकील नरेश झामरी ने फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस द्वारा संजय व सोनू आदि के खिलाफ रास्ता रोककर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़-फोड़ आदि के आरोप लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता और गवाह केवल पुलिस थी। वन विभाग व लोक निर्माण विभाग की ओर से मामले में कोई गवाह नहीं था और पुलिस कोई गवाह व ठोस साक्ष्य भी पेश नहीं कर पाई। अधिवक्ता नरेश झामरी ने बताया कि जो फोटो पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए। उसमें संजय व सोनू कहीं नहीं थे और न ही कोई सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। न ही पेड़ काटने के कोई सबूत पेश किए जा सके। जिस पर सीजेएम कोर्ट ने संजय व सोनू को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया है। उल्लेखनीय है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा सोनू व संजय निवासी मारौत के खिलाफ रास्ता रोकने, पेड़ काटने व तोड़फोड़ आदि के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया गया था।