बहादुरगढ़। झज्जर रोड पर नूना माजरा गांव के पास स्थित स्कॉलर ग्लोबल स्कूल में बाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में एक घोड़े के बेकाबू होने से कई बच्चों की जान पर बन आई। बेकाबू घोड़े ने कार्यक्रम में मौजूद कई बच्चों को चोटिल कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने बिना अभिभावकों को सूचना दिए बच्चों को स्कूल बस से घर भिजवा दिया। सूत्रों की माने तो स्कूल में करीब 10-12 बच्चे घायल हुए हैं। हालांकि देर रात तक स्कूल प्रबंधन इस बारे में कुछ भी कहने से बचता रहा।
कार्यक्रम में एक घोड़ा हुआ बेकाबू
छात्र ऋषभ के ताऊ धर्मवीर ने आरोप लगाया कि बाल दिवस पर स्कॉलर ग्लोबल स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को रोमांचित करने के लिए स्कूल प्रबंधन ने दो घोड़ों को बुलाया। कार्यक्रम के दौरान ही उनमें से एक घोड़ा बेकाबू हो गया। बेकाबू घोड़े ने स्कूल के कई बच्चों को चोटिल कर दिया। बेकाबू घोड़े की चपेट में उनका भतीजा ऋषभ भी आ गया। उन्होंने बताया कि स्कूल से आने के ऋषभ ने बैंकॉक में सर्विस कर रहे पिता को फोन पर बताया कि डैडी स्कूल में कार्यक्रम के दौरान एक घोड़े उसकी गर्दन पर भी लात मारी है, और उसे बहुत दर्द हो रहा है, इतना कहते ही बच्चा रोने लगा।
बच्चे को घर छोड़ने के बाद स्कूल प्रबंधन ने दी सूचना
धर्मवीर ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि घटना के बारे में स्कूल प्रबंधन ने बच्चे को घर छोड़ने के बाद सूचना दी। उन्होंने बताया कि ऋषभ के पिता बैंकॉक में सर्विस करते हैं और मां गुरुग्राम में किसी कंपनी में नौकरी करती हैं। स्कूल प्रबंधन ने बच्चे के घर पहुंचने पर उसकी मां को फोन कर घटना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब तक मेरे पास सूचना आती तब तक स्कूल बस बच्चे को छोड़कर चली गई थी।
स्कूल प्रबंधन को भारी पड़ी घुड़सवारी
धर्मवीर ने कहा कि जब स्कूल प्रबंधन के पास घुड़सवारी के पर्याप्त साधन या अनुभवी लोग नहीं थे जो घटना के दौरान घोड़े पर काबू सकते थे, तो ऐसे में स्कूल प्रबंधन को चाहिए था कि घोड़ों का कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे को कुछ हो जाता तो क्या बच्चे इसी तरह से घर भिजवाता स्कूल प्रबंधन। स्कूल प्रबंधन का यह रवैया बेहद ही शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि वह जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को स्कूल पर सख्त कार्रवाई के लिए लिखेंगे।
कार्यक्रम में दो घोड़ों को बुलाया था
धर्मवीर की माने तो बाल दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को लुभाने के लिए दो घोड़ों को बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान ही एक घोड़ा बेकाबू हो गया। घोड़े को काबू करने के लिए वहां पर कोई भी व्यवस्था नहीं थी, अगर स्कूल की ओर से उचित व्यवस्था की गई होती तो शायद इतने बच्चों को चोटें नहीं आतीं। यह सीधे-सीधे स्कूल प्रबंधन की लापरवाही है। जिससे लिए वह पूरी तरह से जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चोटिल बच्चों को स्कूल की तरफ से पर्याप्त इलाज भी मुहैया नहीं कराया गया था।
शहर के निजी अस्पताल में कराया बच्चे का इलाज
धर्मवीर ने बताया कि बच्चे ने स्कूल से आने पर घटना की जानकारी की थी, उसके तुरंत बाद ही बच्चे को शहर के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। गर्दन में चोट की शिकायत पर वहां के डॉक्टरों ने सिटी स्कैन के लिए लिखा। उसके बाद ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल में बच्चे की सिटी स्कैन कराया। जिसके बाद उसकी गर्दन का इलाज चल रहा है।
घटना से बचता रहा स्कूल प्रबंधन
संबंधित घटना की जानकारी के लिए स्कूल के डॉयरेक्टर प्रदीप दहिया से कई बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने उक्त घटना की जानकारी देने से बचते रहे।
घर पहुंचते ही रोया ऋषभ
स्कॉलर ग्लोबल स्कूल में कक्षा चौथी में पढ़ने वाला 9 वर्षीय छात्र ऋषभ घर पहुंचते ही रोने लगा। पिता के पूछने पर छात्र ऋषभ बोला डैडी आज मेरे साथ स्कूल में बहुत बुरा हुआ। उसने फोन पर अपने पिता को घटना की पूरी जानकारी दी।