हिसार में एक शादी समारोह में शिरकत कर गुड़गांव की ओर लौट रहे इंजीनियरिंग के दो छात्रों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। ट्रक से टकराने के बाद उनकी स्विफ्ट कार के परखच्चे उड़ गए।
दोनों छात्र कार में बुरी तरह से फंस गए और अधिक चोटें लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर थाना सदर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और गाड़ी में फंसे शवों को बाहर निकाला।
दुर्घटना के बाद मृतकों के परिजनों व उनके कॉलेज में मातम छा गया।
मूल रूप से बरोदा व हाल सेक्टर-1 रोहतक निवासी पंकज (24) गुड़गांव के आईटीएम से बी-टेक फाइनल ईयर का छात्र था। उसका साथी हिसार निवासी धीरेंद्र (24) भी गुड़गांव से ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और फिलहाल वहीं पर कोचिंग भी ले रहा था।
दोनों दोस्त अक्सर एक साथ ही रहते थे। दोनों हिसार में अपने एक परिचित के भाई की शादी में गए थे। रविवार की रात को जब वे हिसार से वापस गुड़गांव जा रहे थे तो बहादुरगढ़ में बालोर मोड़ के नजदीक बाईपास पर एक ट्रक से उनकी स्विफ्ट कार टकरा गई।
दोनों साथियों की वहीं पर मौत हो गई। उनके पास मिले कागजातों के आधार पर पहचान हुई। सोमवार की अल सुबह जब उनके परिजनों, परिचितों को पता चला तो हर कोई सिविल हॉस्पिटल बहादुरगढ़ की और दौड़ते दिखे।
पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के हवाले कर दिए। छात्रों की मौत से उनके शिक्षण संस्थान में भी सन्नाटा पसर गया। सूचना मिलते ही वहां से उनके कई साथी व शिक्षक बहादुरगढ़ सिविल हॉस्पिटल पहुंचे।
हंसी-खुशी शादी समारोह से वापस लौट रहे दोनों दोस्तों की पलभर में ही मौत होने से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
हॉस्पिटल के शवगृह के बाहर खड़े परिजनों व परिचितों का रो-रोकर बुरा हाल था। शवों को लेने के लिए काफी संख्या में लोग यहां आए हुए थे।
सपनों को लगने थे पंख
मृतक धीरेंद्र के बड़े भाई हरेंद्र व पंकज के मामा वीरपाल ने बताया कि दोनों जल्द ही पास आउट होने वाले थे। वे अपने सपनों को पंख लगाने के लिए पढ़ाई में पूरा ध्यान दे रहे थे, लेकिन इस हादसे ने परिवार की खुशियों को ग्रहण लगा दिया।
बुझा घर का चिराग
मृतक पंकज तीन बहनों का इकलौता भाई था। उससे एक बड़ी बहन है और दो छोटी। उसके पिता आरटीए विभाग में असिस्टेंट के तौर पर कार्य करते हैं।
लाड-प्यार से परिवार ने उसकी परवरिश की थी मगर उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यही नहीं मृतक धीरेंद्र के सिर से तीन साल पहले ही पिता का साया छिन गया था। परिवार अभी उस हादसे से सही से उभरा भी नहीं था कि अब धीरेंद्र के जाने से परिवार काफी सदमे में है।