पोस्टमार्टम कक्ष पड़ा छोटा, इमरजेंसी कक्ष के बाहर रखे शवों को देख बेसुध हुए परिजन
पिता को गंवाने के बाद हादसे में गंवाया प्रमिला ने पति
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। दादरी-दिल्ली मुख्यमार्ग पर गांव लोहरवाड़ा के समीप हुए हादसे में एक साथ पांच लोगों की मौत होने के बाद सिविल अस्पताल में भी व्यवस्था कम पड़ती नजर आई। सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष में जगह कम पड़ने पर पांचों शवों को इमरजेंसी कक्ष के बाहर ही स्ट्रेचर पर रखा गया। हादसे की सूचना पाकर गांव मंदोली से अस्पताल पहुंचे मृतकों के परिजन शवों को देखकर विलाप करते बेसुध भी हो गए। वहीं, शवों के पोस्टमार्टम के लिए कागजी कार्रवाई करने के लिए पांच जांच अधिकारियों व उनके सहायकों को सिविल अस्पताल बुलाया गया। शाम करीब पांच बजे तक पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद पांचों शव परिजनों को सौंप दिए।
वीरवार सुबह नौ बजे हादसे में मंदोली निवासी बुजुर्ग दंपति ओमप्रकाश व लीलो देवी ने अपनी आंखों के सामने परिवार के पांच सदस्य गंवा दिए। मृतकों में उनका बेटा अजय, नाती हार्दिक, बेटी मंजू, लीलो देवी की बहन सावित्री, पोता हर्षित व उसकी मां ज्योति शामिल हैं। हादसे के वक्त बुजुर्ग दंपति अन्य परिजनों सहित ऑल्टो के पीछे स्पेशियो गाड़ी में ही थे। मृतक अजय के रमेश ने बताया कि सुबह करीब साढ़े आठ बजे परिवार के करीब 17 सदस्य दो गाड़ियों में सवार होकर बेरी के गांव डीघल जाने के लिए मंदोली से चले थे। उन्होंने बताया कि उसके भतीजे अजय के ससुर की गत दिनों मौत हो गई थी और वो सभी मातमपुर्सी के लिए ही जा रहे थे। करीब सवा नौ बजे वो गांव लोहरवाड़ा के समीप पहुंचे तो उनके आगे चल रहे ऑल्टो चालक रोडवेज को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इस पर बस चालक ने एकाएक आगे चल रहे वाहन को ओवरटेक के प्रयास में ऑल्टो को साइड मार दी। इससे अजय संतुलन खो बैठा और गाड़ी सड़क किनारे खड़े पेड़ से जा टकराई। ऑल्टो में सवार अजय के अलावा उसकी बहन मंजू, भांजा हार्दिक व जयंत, मौसी सावित्री देवी, भाभी ज्योति व भतीजा हर्षित को बचने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद सिविल अस्पताल में एंबुलेंस की कमी देखने को भी मिली। निजी गाड़ियों से भी घायलों को सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। घायल बिजेंद्र सहित उसकी चचेरी बहन मंजू व भांजा जयंत को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही खापों के पदाधिकारियों सहित विभिन्न पार्टियों से जुड़े राजनेता व जिले के मौजिज लोग भी सिविल अस्पताल पहुंचे।
चिकित्सकों की रही कमी, एंबुलेंस का भी किया इंतजार
हादसे के बाद सिविल अस्पताल में चिकित्सकों व अन्य चिकित्सा सुविधाओं की कमी साफ नजर आई। हालांकि वहां तैनात एसएमओ व एक चिकित्सक व स्टाफ नर्सें तुरंत घायलों की मरहम-पट्टी में जुट गई। इन्हें प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रेफर किया गया। इस दौरान घायल बिजेंद्र को एंबुलेंस के लिए करीब 10 मिनट तक गेट के बाहर इंतजार करना पड़ा।
हादसों में खोए दो बेटे
मंदोली निवासी ओमप्रकाश के बड़े बेटे बंटी की करीब पांच साल पहले ही सीने में दर्द उठने से मौत हो गई थी। इसके बाद अजय की शादी बंटी की पत्नी प्रमिला से कर दी थी। मृतकों के परिजनों ने बताया कि प्रमिला पिता की मौत के चलते अपने मायके डीघल गई हुई है। इस हादसे के बाद ओमप्रकाश ने अपने दूसरे बेटे को भी खो दिया। हादसों में दोनों बेटों को गंवाने पर बुजुर्ग पिता ओमप्रकाश सदमे में है।
बेटे को जबरन स्कूल छोड़कर आया मृतक अजय तो बच गई जान
घटना में काल का ग्रास बने अजय का बेटा वंश भी साथ चलने की जिद कर रहा था। सिविल अस्पताल पहुंचे परिजनों ने बताया कि वह तैयार होकर गाड़ी में भी बैठ गया था लेकिन चलने से ठीक पहले अजय ने उसे नीचे उतारा और स्कूल छोड़कर आया। मंदोली के ग्रामीणों ने बताया कि गनीमत रही कि वंश को अजय साथ नहीं लेकर आया।
हादसे के बाद तीन गांवों में पसरा सन्नाटा
हादसे में जिन पांच लोगों की मौत हुई वो मंदोली, धारेडू व मातनहेल के रहने वाले हैं। मंदोली निवासी अजय के साथ-साथ उसकी बहन के ससुराल मातनहेल व धारेेडू में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हादसे के बाद मंदोली गांव में भी लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। वहीं, अजय की ससुराल डीघल में पहले ही गमगीन माहौल था और इसके चलते अजय की पत्नी प्रमिला को उसकी मौत की खबर परिजनों ने नहीं दी थी।