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कृष्णा और उसके रिश्तेदारों की मौत से हर किसी को लगा धक्का

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
खाटू श्याम की तीर्थयात्रा पर गए लोगों के साथ हादसा होने के संबंध में पूरी जानकारी न होने के बावजूद सोमवार रात को सेक्टर-7 स्थित कृष्णा के घर और आस-पड़ोस में गमगीन माहौल बना रहा। जिस भी पड़ोसी को हादसे में पांच लोगों की मौत और दो लोगों के घायल होने की जानकारी मिली, उसे धक्का-सा लगा। हर किसी की आंखें नम नजर आईं।
माजरा के पास हुए हादसे में बहादुरगढ़ के सेक्टर-7 की कृष्णा (42) पत्नी श्याम सुंदर, उनके भाई अनिल (34), अनिल की पत्नी अनुजा (30), अनिल के बेटे नमन (8) व अनिल की मां पाना देवी की मृत्यु हुई है। जबकि बच्ची अदिति व छात्रा स्मृति की हालत नाजुक है। हादसे की जानकारी मिलने पर वार्ड से नगर पार्षद सत्यप्रकाश व सुशील अग्रवाल सहित काफी लोग कृष्णा के घर के बाहर इकट्ठे हो गए। हादसे में जिन पांच लोगों की मौत हुई है उनमें चार फरीदाबाद निवासी थे।
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पाना को पिलानी से खींच लाई मौत
कृष्णा का भाई अनिल काफी वर्षों तक बहादुरगढ़ रहा। करीब तीन साल पहले वह फरीदाबाद चला गया। कुछ समय से वह बिल्डर/प्रॉप्रर्टी डीलर का काम कर रहा था। अनिल ने नव वर्ष पर भगवान खाटू श्याम के दर्शन का प्लान बनाया था। रविवार को वह पत्नी अनुजा, बेटे नमन व बेटी अदिति के साथ बहादुरगढ़ आ गया और यहां से उसने अपनी बहन कृष्णा व भांजी स्मृति को गाड़ी में बैठाया और खाटूश्याम चले गए। दर्शन के बाद सोमवार को वे वापस घर के लिए चल दिए। रास्ते में कुछ देर वे पिलानी में अपने पैतृक निवास पर रुक गए। वहां से उन्होंने अपनी मां को गाड़ी में बैठाया और बहादुरगढ़ के लिए चल दिए। शाम सवा चार बजे जब वो दादरी पहुंचे तो गुरुग्राम निवासी कृष्णा के भांजे सोमांश के साथ उनकी बात हुई थी। छह बजे परिजनों को हादसे की सूचना मिल गई।
कार्तिक और स्मृति के सिर से 10 साल पहले उठा पिता और अब मां का साया
दरअसल, राजस्थान के पिलानी के निवासी श्यामसुंदर करीब 10 साल पहले बहादुरगढ़ आया था। उनका परिवार बहादुरगढ़ के सेक्टर-7 में किराए पर रह रहा था। करीब 8 साल पहले हृदयाघात से उनकी मौत हो गई। उसके बाद से दोनों बच्चों (कार्तिक और स्मृति) की परवरिश व परिवार चलाने की जिम्मेदारी कृष्णा के कंधों पर आ गई। घर में सिलाई आदि का कार्य करके कृष्णा ने अपने बच्चों की परवरिश की। फिलहाल कृष्णा का बेटा कार्तिक बहादुरगढ़ के एक कार शोरूम में काम करता है, जबकि बेटी स्मृति एसआर सेेंच्युरी स्कूल में 12वीं कक्षा की छात्रा है। दस साल पहले हुई पिता की मृत्यु के बाद अब बहन-भाई के सिर से मां का साया भी उठ गया।
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सोमवार को आकर करूंगी काम
सामाजिक कार्यकर्ता और योग टीचर अंजू अग्रवाल ने कहा कि कृष्णा बेहद ही विनम्र स्वभाव की महिला थी। वह रोजाना अपनी मकान मालकिन के साथ उनकी योगा क्लास में आती थी। शनिवार को उन्होंने कृष्णा को कुछ काम दिया था। तब कृष्णा ने कहा कि मुझे कहीं बाहर जाना है। सोमवार को आकर सबसे पहले आपका काम करूंगी। अंजू ने कहा कि वह तो सोमवार को कृष्णा के आने का इंतजार कर रही थी। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
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