चरखी दादरी। करोड़ों का चूना लगाकर दादरी अनाज मंडी से फरार होने वाली दोनों फर्म संचालकों के खिलाफ रविवार को विभिन्न गांवों के किसानों ने अपनी भुगतान राशि बकाया होने के दावे दर्ज कराए। अवकाश के बावजूद मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों ने करीब नौ घंटे तक किसानों के दावों का ब्योरा दर्ज किया। शाम करीब साढ़े छह बजे तक 221 किसानों के दावे विभाग के पास पहुंचे थे। करीब 15 किसान दावा दर्ज कराने के इंतजार में थे। वहीं, फरार आढ़ती भाइयों को ब्याज पर रकम देने वाले भी सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर किसान हैं। उन्होंने फसल के साथ-साथ ब्याज और बिन ब्याज के फर्म संचालक रोशन लाल और रामनिवास को धनराशि दे रखी है।
किसानों की शिकायत पर सिटी थाने में जय दादा गुंसाई ट्रेडिंग और किरोड़ीमल रामकुमार ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। वहीं, किसानों ने जिला उपायुक्त मुकेश आहूजा को भी इस संबंध में शिकायत सौंपी थी। मामले की गंभीरता को देखकर उपायुक्त ने किसानों के दावे दर्ज करने के लिए छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सतबीर कुंडू थे। उपायुक्त के निर्देशानुसार रविवार को मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय में किसानों के सबूत के साथ दावे दर्ज किए गए। मंडी सुपरवाइजर रामकिशन ने बताया कि शाम करीब साढ़े छह बजे तक 221 किसानों के दावे हमारे पास सबूत के साथ आए हैं जबकि करीब 15 किसान अभी बाकी हैं। किसानों के दावे शाम चार बजे तक ही दर्ज किए जाने थे लेकिन ज्यादातर संख्या में किसान पहुंचने के बाद मार्केटिंग बोर्ड ने समयावधि तीन घंटे और बढ़ा दी। इन 221 किसानों ने कितनी फसल दोनों फर्म को बेची है इसका आकलन सोमवार को मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी करेंगे।
वहीं, मार्केटिंग बोर्ड सूत्रों की मानें तो फर्म संचालकों को बिन ब्याज और ब्याज पर रुपये देने वाले भी सामने आए हैं। ये अपने दावें दर्ज कराने मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय भी पहुंचे लेकिन वहां से उनको वापिस भेज दिया गया। मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों ने गत सीजन में सरसों, कपास, गेहूं और ग्वार बेचने वाले किसानों के दावें दर्ज किए। सूत्रों की मानें तो मंडी में रविवार को 350 से अधिक लोग पहुंचे। इनमें से कुछ के पास फसल बेचने का कोई सबूत नहीं था तो कुछ नकद रुपये देने के केस भी थे। बिन सबूत वाले और नकद देने वालों के दावे दर्ज नहीं किए गए और उन्हें लौटना पड़ा। मंडी सुपरवाइजर रामकिशन ने बताया कि दावे दर्ज कराने वाले किसानों से आधार कार्ड की प्रति और सबूत की प्रति ली गई। उन्होंने बताया कि जिन 221 किसानों ने अपने दावे दर्ज कराए हैं उनमें से 99 प्रतिशत ने सरसों बेची है। कुछ किसान गेहूं और कपास बेचने वाले भी हैं। मंडी सुपरवाइजर ने बताया कि इन किसानों की फसलों के कुल वजन और भुगतान राशि का आकलन सोमवार को किया जाएगा।
फसल जमा करके किसानों को थमाते थे कच्ची पर्ची
मंडी सुपरवाइजर रामकिशन ने बताया कि फर्म संचालक किसानों से अनाज लेकर उन्हें कच्ची पर्ची थमा देते थे। उन्होंने बताया कि सभी किसानों के पास ऐसी ही पर्ची मिली हैं। अगर कोई किसान एक से अधिक बार फसल बेचता तो वो पुरानी पर्ची में ही उसे एड कर देते थे। इस पर्ची में न तो फर्म का नाम है और न अन्य कोई जानकारी। किसानों से इन पर्चियों की फोटो कॉपी ली गई है। इन पर्चियों की भी अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।
दावेदार बोले- रुपये मांगने पर कहते थे, मंडी से भागकर नहीं जाएंगे
- मैंने जय दादा गोसाई ट्रेडिंग कंपनी को 12 और 14 अप्रैल को 75 क्विंटल सरसों बेची थी। इसमें से 25 क्विंटल का वह भुगतान कर चुका था जबकि 50 क्विंटल का बकाया था। मांगने पर बोलते दोनों भाई बोलते थे कि हम मंडी से भाग तो नहीं जाएंगे। - अत्तर सिंह, किसान, घसोला
- मुझे किरोड़ीमल रामकुमार ट्रेडिंग कंपनी संचालक रोशनलाल से छह लाख 17 हजार 400 रुपये लेने हैं। ये रुपये मैंने उसे 12 अप्रैल को दिए थे। इसके अलावा दो बार में 147 क्विंटल सरसों भी बेची थी। कुछ दिन बाद भुगतान करने की बात रोशन लाल ने कही थी। - संदीप, किसान खेड़ी बूरा
- मैंने किरोड़ीमल ट्रेडिंग कंपनी को अपनी करीब 100 क्विंटल सरसों बेची थी। इसके भुगतान के लिए मैंने पांच-छह चक्कर भी काटे लेकिन हर बार रोशनलाल टाल देता था। अंतिम बार जब मैं गया तो उसने कहा कि वो मंडी छोड़कर नहीं भागेगा और जल्द रुपये दे देगा। - मोती, खेउ़ी बूरा
- मैंने दो लाख 84 हजार की 71 क्विंटल ग्वार 15 मई को, चार लाख 20 हजार की सरसों चार अप्रैल को रोशन लाल को दी थी। इसके अलावा डेढ़ लाख रुपये नकद भी गत 22 फरवरी को दिए थे। मुझे करीब साढ़े छह लाख रुपये रोशन लाल से लेने हैं और फसलों का दावा दर्ज करवा दिया है। - बलबीर, खेड़ी बूरा
सुबह दस से शाम साढ़े छह बजे तक 221 किसानों ने अपने दावे दर्ज कराए हैं। कुछ नकद देने वाले केस भी थे जिनके दावे हमने दर्ज नहीं किए। सोमवार तक फर्मों को बेची गई फसलों को आकलन हम कर लेंगे। - रामकिशन, मंडी सुपरवाइजर