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पुलिस की लापरवाही से व्यापारी के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए पीड़ित परिजन

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
संदिग्ध परिस्थितियों में गत 16 मार्च को घर से लापता हुए शहर के प्रसिद्ध व्यापारी वीके गुप्ता का सुराग आखिर लग ही गया। गुप्ता की 17 मार्च को ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी और रेलवे पुलिस ने शव मिलने के 72 घंटे बाद भी शिनाख्त न हो पाने पर गत मंगलवार को शव की अंत्येष्टि करा दी थी। लापता व्यापारी की तलाश में बुधवार को रेलवे पुलिस थाने पहुंचे परिजनों ने मृतक के फोटो व कपड़ों के आधार पर शव की शिनाख्त की। लेकिन पुलिस की लापरवाही की वजह से पीड़ित परिवार मृतक के अंतिम दर्शन करने से भी वंचित रह गया।
शहर के सबसे बड़े इंटीरियर शोरूम होम सिटी के मालिक वीके गुप्ता 16 मार्च की रात को सेक्टर-6 स्थित अपने घर से टहलने के लिए निकले थे, मगर घर नहीं लौटे। तब से ही पूरा परिवार उनकी तलाश में जुटा था। पीड़ित परिवार ने पूरे शहर में गुप्ता की तलाश में इश्तहार तक जारी किए। सोशल मीडिया का भी सहारा लिया गया। शहर थाना पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन उनका सुराग नहीं लग सका।
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इस बीच राजकीय रेलवे पुलिस को आसौदा और बहादुरगढ़ स्टेशन के बीच 17 मार्च की सुबह ट्रैक पर दो टुकड़ों में एक शव मिला। यह शव व्यापारी वीके गुप्ता का ही था, लेकिन इस बारे में न तो जीआरपी की तरफ से शहर थाना पुलिस को जानकारी दी गई और न ही शहर थाना पुलिस का संपर्क जीआरपी से हुआ। ऐसे में व्यापारी का शव लावारिस बना रहा। 72 घंटों तक जीआरपी की ओर से शव को सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा गया और परिवार के सदस्य उनकी तलाश में भटकते रहे।
20 मार्च की शाम को हुई अंत्येष्टि
निर्धारित समयावधि में पहचान शव की नहीं हुई तो 20 मार्च की शाम को पुलिस ने नगर परिषद के माध्यम से अंतिम संस्कार मोक्ष समिति से करवा दिया। परिवार के लोग गुप्ता की तलाश करते हुए बुधवार की सुबह जीआरपी पहुंच गए। तब जाकर पता लगा कि व्यापारी वीके गुप्ता तो बीती सायं ही पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। इसके बाद परिवार गम में डूब गया। वीरवार को गुप्ता परिवार की ओर से मृतक की अस्थियां चुनी जाएंगी।

पुलिस में तालमेल होता तो परिजनों को मिल सकता था शव
इस मामले में जीआरपी और सिटी थाना पुलिस का तालमेल सही होता तो परिजनों को शव मिल सकता था। इधर, जीआरपी ने शव को पहचान के लिए 72 घंटे तक तो शवगृह में रखवा दिया, लेकिन तीन दिन तक जीआपी द्वारा आसपास के चौकी और थानों से गुमशुदा लोगों की जानकारी नहीं ली गई। उधर, सिटी थाना पुलिस ने भी परिजनों की सूचना पर गुमशुदगी का पर्चा तो दर्ज कर लिया, लेकिन उनको तलाशने के प्रयास नहीं किए। कायदे से तो गुमशुदगी की सूचना तमाम चौकी थानों में गुमशुदा व्यक्ति के फोटो समेत जारी की जाती है। मगर सिटी पुलिस ने अपने ही शहर की जीआरपी और रेलवे पुलिस से संपर्क नहीं किया। यदि पुलिस के बीच कम्युनिकेशन गैप नहीं होता तो शायद गुप्ता परिवार को वीके गुप्ता के अंतिम दर्शन हो जाते।

बहादुरगढ़ से रोहतक की मिली थी टिकट
मृतक के कपड़ों की जेब से बहादुरगढ़ से रोहतक तक ट्रेन की टिकट भी बरामद हुई थी। वह इतनी रात को ट्रेन से कहां जा रहे थे, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। पीड़ित परिवार ने भी इस बारे में अनभिज्ञता जताई है। ऐसे में यह साफ नहीं हो पाया कि वे बहादुरगढ़ से ट्रेन में सवार हुए तो रास्ते में उनके साथ ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद उनका शव ट्रैक पर दो हिस्सों में मिला।

जीआरपी का कहना है
पुलिस ने मामले को हादसा मानकर कार्रवाई की थी। शव मिलने के दिन ही पुलिस कंट्रोल रूम और केबल टीवी व अखबार आदि सभी संचार साधनों के द्वारा मृतक की पहचान के प्रयास किए गए। परिजन बुधवार को ही जानकारी लेने के लिए पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। अब नए सिरे से जांच की जा रही है।
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- मंजीत सिंह, प्रभारी, जीआरपी बहादुरगढ़

क्या कहती है सेक्टर-6 चौकी पुलिस
हमें पीड़ित परिवार ने 18 मार्च को सूचना दी थी कि 16 मार्च को वीके गुप्ता लापता हो गए हैं। रिपोर्ट दर्ज कर हमने तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस कंट्रोल रूम के जरिये सूचना जारी की गई। बुधवार को जीआरपी थाने में यह तय पाया गया कि गुप्ता की 17 मार्च को ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई थी। उनके गायब होने के कारणों की जांच की जा रही है।
- मनोज कुमार, प्रभारी पुलिस चौकी, सेक्टर-6, बहादुरगढ़।
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