अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
तहसील कार्यालय में गंभीर किस्म की अनियमित्ताएं पाए जाने पर जिला उपायुक्त ने तहसीलदार कंवल सिंह यादव से भूमि पंजीकरण करने की शक्तियां छीन ली हैं। तहसीलदार से रजिस्ट्री की शक्ति वापस लेने के कारण बुधवार को तहसील में कोई रजिस्ट्री नहीं हो पाई। जिससे जमीन संबंधी काम कराने के लिए आए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बता दें कि बादली को जब से तहसील का दर्जा मिलने के बाद अधिकारी और कर्मचारी बैठने शुरू हुए हैं। तभी से उनकी कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगते आए हैं। गत 31 अगस्त को सीटीएम झज्जर की टीम ने बादली तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान काफी लापरवाही पाई गई थी। रजिस्ट्री क्लर्क की कुर्सी पर कोई बाहरी व्यक्ति कंप्यूटर पर काम करते पाया गया। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री रेवेन्यू को जमा कराने में भी देरी सामने आई थी। इसके अलावा दो दिनों से सरकारी खजाने को बैंक में जमा नहीं कराया गया था। इस बारे जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर जिला उपायुक्त को सौंपी थी।
इसी रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने तहसीलदार से रजिस्ट्री करने की पावर वापस ले ली। वहीं, तहसील कार्यालय में तहसीलदार की शक्ति वापस लेने के आदेश मिलने के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सभी कर्मचारियों में चर्चा थी कि निरीक्षण के दौरान आरसी की खामियां मिली थी। आरसी ने जहां बिना अनुमति के निजी कर्मचारी को कुर्सी पर काम करने की जिम्मेवारी सौंप रखी थी। वहीं रजिस्ट्री रेवेन्यू को भी दो दिन से बैंक में जमा नहीं करवाया गया था।
क्या कहते हैं तहसीलदार
तहसीलदार कंवल सिंह यादव का कहना है कि वह सरकारी आदेशों की पालना करते हैं। नए आदेशों के तहत अब वे रजिस्ट्री नहीं करेंगे। तहसील में कुछ कर्मचारी राजनीतिक पहुंच रखते है। जिसके चलते उन पर दबाव बनाने का प्रयास जारी है। जिस दिन टीम ने तहसील का निरीक्षण किया उस दिन मेरे पास रजिस्ट्री करने का दिन भी नहीं था।