अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। दो साल पहले बेरी में एक व्यक्ति से 12 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में झज्जर की जिला सत्र न्यायाधीश कमलकांत की अदालत ने वहां के तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क सहित तीन लोगों को दोषी करार दिया है। आरोपियों में दो दलाल भी शामिल हैं, जिनकी मार्फत रजिस्ट्री क्लर्क ने रिश्वत ली थी। सभी आरोपियों को 24 जनवरी को अदालत द्वारा सजा सुनाई जाएगी।
गांव दूबलधन के धर्मबीर नामक व्यक्ति ने विजिलेंस विभाग को दी शिकायत में बताया था कि बेरी तहसील के तत्कालीन आरसी समुंद्र द्वारा उसके प्लॉट का इंतकाल दर्ज कराए जाने की एवज में 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। इस मामले में शिकायत मिलते ही विजिलेंस ने आरोपी को पकड़ने का जाल बिछाया। योजनाबद्ध तरीके से आरसी को दी जाने वाली रिश्वत की रकम हस्ताक्षरयुक्त रुपये शिकायतकर्ता को दिए गए। इसके लिए जिला उपायुक्त की तरफ से ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किया गया। लेकिन शिकायतकर्ता धर्मबीर ने जैसे ही रिश्वत की रकम आरसी संमुद्र को देनी चाही तो उसे वह रकम गांव बाघपुर के दलाल मनोज को दिए जाने की बात कही गई। बाद में रिश्वत की यह रकम दलाल मनोज को दी गई। रिश्वत की रकम लिए जाने के बाद मनोज ने दो हजार रुपये उसमें से स्वयं अपनी जेब में रखते हुए दस हजार रुपये एक अन्य दलाल गांव शेरिया के राजीव को दे दिए गए। दलाल राजीव ने भी इन दस हजार रुपये में से अपना मेहनताना एक हजार रुपये अपनी जेब में रखते हुए बाकी के 9 हजार रुपये आरसी समुंद्र की अलमारी में रख दिए गए। शिकायतकर्ता से इशारा मिलते ही विजिलेंस की टीम ने पहले तो दलाल राजीव व मनोज को काबू किया और बाद में आरसी समुंद्र की अलमारी से वह 9 हजार रुपये बरामद किए जोकि दलाल राजीव द्वारा रखे गए थे। इस मामले की तह तक जाते हुए सोमवार को जिला सत्र न्यायाधीश कमलकांत ने आरसी समुंद्र सहित सभी तीनों आरोपियों को मामले का दोषी करार दिया। तीनों आरोपियों को 24 जनवरी को अदालत द्वारा सजा सुनाई जाएगी।