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सांड ने मारी थी टक्कर, सात महीने बाद मौत

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
लाइनपार क्षेत्र में सात महीने पहले सांड की टक्कर लगने से घायल हुए पूर्व पार्षद बलजीत सिंह नांदल के पिता चंद्र सिंह नांदल का निधन हो गया। उनके देहांत पर विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के लोगों ने शोक जताया है।
लाइनपार निवासी पूर्व पार्षद बलजीत सिंह नांदल के पिता चंद्र सिंह नांदल (88) गत जुलाई में सुबह के वक्त घूमने के लिए घर से निकले थे। जब वह अपनी फ्रेंड्स कॉलोनी की गली में टहल रहे थे तो पीछे से एक सांड ने टक्कर मार दी थी। हादसे में चंद्र सिंह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उनका आपरेशन कराया गया, मगर वह चलने-फिलने में असमर्थ रहे। गत जुलाई से लेकर अब तक वह बेेड पर ही रहे। वीरवार सुबह उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई और दोपहर बाद उनका निधन हो गया। वीरवार की शाम स्थानीय श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार हुआ। विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग उनकी अंत्येष्टि के मौके पर मौजूद रहे।
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पहले भी हुई घटनाएं
चंद्र सिंह नांदल के घायल होने के बाद इसी कॉलोनी में लाइनपार निवासी दो बुजुर्ग शेर सिंह व ज्ञान शर्मा भी लावारिस सांडो की टक्कर से जख्मी हो गए थे। उक्त हादसे में बुरी तरह से जख्मी हुए शेर सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जबकि ज्ञान शर्मा कई दिनों बाद स्वस्थ हो पाए थे। इसके अलावा वर्ष 2017 में रोहतक रोड पर किला मोहल्ला निवासी युवक व बादली रोड पर बांबे वाली गली निवासी ललित की मौत हुई थी। उक्त दोनों की बाइक भी लावारिस पशुओं से टकरा गई थी।
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अब भी घूम रहे हैं लावारिस पशु
स्व. चंद्र सिंह के बेटे बलजीत सिंह ने कहा कि लावारिस पशुओं की वजह से कई बार जनहानि हो चुकी है। पिछले दिनों क्षेत्र में स्ट्रे कैटल मुहिम चलाई गई थी। मगर उसका ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा। अब भी कॉलोनियों में लावारिस पशु घूम रहे हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। इन पशुओं के रख रखाव की सही व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि फिर कभी इस तरह की घटना न हो।
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