अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
पुलिस की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। पहले तो पुलिस चोरी के एक मामले में चार साल से फरार चल रहे अपराधी को पकड़ नहीं पाई और जब अपराधी ने मंगलवार दोपहर सरेंडर किया तो भी थाना शहर पुलिस उसे संभाल नहीं पाई। उक्त अपराधी सिटी थाने में पुलिस कर्मियों को चकमा देकर सरेंडर करने के कुछ समय बाद करीब 4:30 बजे फरार हो गया। जिसे पुलिस ने बुधवार दोपहर करीब दो बजे गिरफ्तार की लिया है। थाने से आरोपी द्वारा सरेंडर करने के बाद फरार होने के मामले में अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए एक पुलिस कर्मी पर भी केस दर्ज किया है।
दरअसल, शहर के जटिया मोहल्ले के निवासी मंजीत पर वर्ष-2013 में चोरी का एक केस दर्ज हुआ था। मामले में मंजीत पीओ चल रहा था। पुलिस लगातार उसे ढूंढने का प्रयास कर रही थी। करीब चार साल बाद मंजीत ने मंगलवार को स्वयं थाने में पहुंचकर आत्म समर्पण कर दिया। चोरी के मामले में जेएमआईसी बहादुरगढ़ विवेक कुमार की अदालत ने मंजीत को सजा सुनाई और झज्जर जेल में बंद करने के वारंट जारी कर दिए। जेल ले जाने से पहले पुलिस कर्मचारी उसे थाने ले आए और उसे एमएचसी रूम में छोड़कर कागजी कार्रवाई करने लग गए। इसी बीच मंजीत पुलिस को चकमा देकर भाग गया। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने उसका पीछा भी किया, मगर वह हाथ नहीं आया। पुलिस ने उक्त अपराधी को बुधवार को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, मामले में एएसआई सुखपाल की शिकायत पर मुंशी मंजीत के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। इस पुलिसकर्मी पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप है।
ये भी सवाल
कायदे से तो कागजी कार्रवाई पूरी होने तक मंजीत को लॉकअप में रखा जाना चाहिए था। मगर उसे एमएचसी रूम में ले जाया गया। यदि उसे लॉकअप में बंद किया होता तो वह भाग नहीं पाता। दूसरी बात ये कि यदि एमएचसी रूम में ही उसे रखा गया था तो अपराधी के पास कम से कम पर्याप्त पुलिस होनी चाहिए थी। जिस हिसाब से एक पुलिसकर्मी पर केस दर्ज हुआ है, इससे लगता है कि उस वक्त उस कमरे में केवल वही मौजूद रहा होगा। यदि ऐसा है तो यह सीधे-सीधे लापरवाही दर्शाता है।
अधिकारी बोले
उधर, सिटी थाने के कार्यवाहक प्रभारी एसआई तेलूराम ने बताया कि अपराधी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में क्या लापरवाही रही, इसकी भी गंभीरता से की जा रही है।