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डोली के पीछे-पीछे पहुंची तीन अर्थी तो हिल गया फोर्टपुरा बराणी

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर/बेरी।
फोर्टपुरा बराणी गांव में मंगलवार की सुबह जब डोली के पीछे-पीछे तीन अर्थियां पहुंची तो पूरा गांव हिल गया। गांव में दुख का आलम ये था कि किसी के भी घर चूल्हा नहीं जला। गांव की गलियां सुनसान पड़ी हुई थी। गांव के सभी लोग मृतकों के गेट पर शव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। जिस परिवार में सोमवार देर रात तक बारात जाने के बाद मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां मंगलवार सुबह महिलाओं का चीत्कार सुनाई दे रहा था। बारात में बहु लाने के लिए गए ग्रामीण लौटे तो उनके कंधों पर तीन युवाओं के शवों का भार था। ग्रामीणों द्वारा तीनों शवों का अंतिम संस्कार एक ही चिता में किया गया।

सतबीर के बेटे की थी शादी
फोर्टपुरा बराणी गांव के फौगाट परिवार में सतबीर के बेटे दीपक की शादी थी। जोकि इस समय एयरफोर्स में नौकरी करता है। दीपक की बारात सोमवार की रात को फोर्टपुरा बराणी से भापड़ोदा गई थी। बारात में दीपक के परिवार के ही संजीव, विशाल, अरुण तीनों मांगावास निवासी अपने दोस्त दीपक की कार में रवाना गए थे। जिनका शादी से लौटते समय भापड़ौदा गांव की आईटीआई के पास एक्सीडेंट हो गया। हादसे में चारों की मौके पर ही मौत हो गई।
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हादसे का शिकार बने चारों युवकों का प्रोफाइल

1. 27 जनवरी को दिल्ली डीटीसी में बतौर कंडक्टर ज्वाइन करता विशाल
मृतक विशाल के पिता सुखबीर ने बताया कि 27 जनवरी को उसके बेटे ने दिल्ली डीटीसी में कंडक्टर के पद पर ज्वाइनिंग के लिए जाना था। विशाल ने 12वीं पास करने के बाद फायर एंड सेफ्टी का कोर्स भी कर रखा था। विशाल अपनी बहन का इकलौता भाई था। विशाल के पिता सुखबीर बीएसएफ से रिटायर्ड हैं। विशाल की सड़क हादसे में मौत हो जाने की खबर मिलने पर बहन निशा का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। फिलहाल विशाल रोहतक में पढ़ाई करता था। विशाल सोनीपत में अपने मामा के घर रह रहा था। दो दिन पूर्व ही दीपक की शादी में शरीक होने के लिए गांव में आया था।


2. चार बहनों में इकलौता था संजीव
हादसे में काल का ग्रास बना संजीव चार बहनों का इकलौता भाई था। संजीव के पिता ने बताया कि संजीव छुछकवास स्थित एक निजी विद्यालय में 12वीं कक्षा में पढ़ता था। चारों बहनों में इकलौता भाई होने से बहनों का रो-रो करा बुरा हाल है। संजीव के पिता झज्जर हरियाणा राज्य परिवहन विभाग से इंस्पेक्टर के पद से 2015 में रिटायर्ड हुए थे और अब बेटे की मौत होने से घर का चिराग बुझ गया है। संजीव की मां कृष्णा का 2008 में देहांत हो गया था। संजीव की चारों बहनों की शादी हो चुकी है। संजीव के पिता देवेंद्र ने सुबकते हुए अमर उजाला को बताया कि बारात में उसे जाना था। लेकिन संजीव ने जिद करके कहा कि उसके तीनों दोस्त बारात में जा रहे हैं, इसलिए पापा मुझे भी बारात में जाना है। देवेंद्र के माता-पिता और धर्मपत्नी का पहले देहांत हो चुका है, अब बेटे की मौत के बाद देवेंद्र अकेला रह गया। देवेंद्र को दिलासा देने वालों के पास शब्द भी नहीं थे।

3. पहले पिता की मौत, अब सड़क हादसे में बेटे मौत
सड़क हादसे का शिकार हुआ अरुण अपनी बहन का इकलौता भाई था और करीब डेढ़ साल पहले उसके पिता प्रदीप की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। अरुण की मौत होने से घर में मातम छा गया है और बहन तन्नू व मां कविता का रो-रो करा बुरा हाल हो गया है। अरुण 12वीं की पढ़ाई करने के बाद 18 वर्षीय अरुण रोहतक के एक कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में शिक्षा ग्रहण कर रहा था।

4. दोस्ती में गांव फोर्टपुरा बराणी गया था दीपक
गांव मांगावास निवासी दीपक के दोस्तों के परिवार में शादी थी और सोमवार को वह गांव फोर्टपुरा बराणी अपनी कार को लेकर चला गया। जहां से चारों दोस्त कार में भापड़ोदा बारात में चले गए। आधी रात भापड़ोदा से लौटते समय हादसा हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही मांगावास गांव में मातम छा गया। दीपक के पिता झज्जर हरियाणा राज्य परिवहन विभाग में असिस्टेंट ग्लास कटर हैं तथा परिवार में दीपक का एक बड़ा भाई भी है।
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बड़ी मन्नतों के बाद पैदा हुआ था संजीव
हादसे में काल के मुंह में समाए संजीव की मां की मौत करीब आठ-दस साल पूर्व हो चुकी है। चारों बेटियों के जन्म के काफी समय बाद संजीव का जन्म हुआ था। जिसके लिए देवेंद्र और उसकी पत्नी ने न जाने कितने धार्मिक स्थलों पर मन्नतें मांगी थी। हालांकि संजीव के जन्म के 6-7 साल बाद ही उसकी मां का बीमारी के चलते निधन हो गया था।
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