श्री अशेश्वर महादेव सेवा समिति के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कलश शोभा यात्रा के साथ हुआ। बैंड-बाजों के साथ सैकड़ों सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा निकाली गई कलश यात्रा सुनारों वाली प्याऊ से आरंभ होकर शहर के विभिन्न स्थानों से होती हुई शहर की पंजाबी धर्मशाला पहुंची। दोपहर बाद आरंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पंडित मोहित भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जिस स्थान पर होता है, वहां भगवान स्वयं किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि उस स्थान की पवित्रता भी बढ़ जाती है, जहां कथा का आयोजन किया जाता है। आचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनना व सुनाना बड़े भाग्य की बात होती है। धार्मिक आयोजन जहां हमारी प्राचीन संस्कृति को जीवित रखने में सहायक होते हैं, वहीं धार्मिक आयोजनों से मन में आए बुरे विचार भी दूर होते है। पं. मोहित ने कहा कि आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में अगर हमने तनाव से छुटकारा पाना है तो हमें धार्मिक आयोजनों का सहारा लेना ही होगा। श्रीमद्भागवत कथा के बीच-बीच में भागवताचार्य ने मधुर भजनों का भी रसपान करवाया। मधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। इस मौके पवन वर्मा, देवेंद्र सोनी, महेंद्र वर्मा, बिजेन्द्र सेढ़ा, रोहित वर्मा, लोकेश सैनी बाले सांगवान, शंटी तलवार, संतराम प्रजापति, बिल्लु प्रजापति, सुमित कुमार कुमार सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रीमद्भागवत कथा का समापन 10 अगस्त को भंडारे के साथ होगा।