गर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कारण पार्षदों के साथ-साथ शासन और प्रशासन की भी छवि धूमिल हो रही है। नगर परिषद के सचिव ने 19 जुलाई को बोर्ड की बैठक बुलाई है। बैठक के प्रस्तावित एजेंडे के संबंध में संशय दूर करने के लिए लगभग 16 पार्षदों ने अधिकारियों से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है। ताकि जनहित में मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। उनका आरोप है कि नगर परिषद में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। वहीं पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद सचिव की ओर से जारी पत्र में 66 प्वाइंट दर्ज है, उनमें से केवल 65 नंबर प्वाइंट पर ही विकास कार्य की बात कही गई है। बाकी सभी प्वाइंट पर केवल भुगतान की बात कही गई है। पार्षद संदीप कुमार, प्रेमचंद, राममूर्ति, प्रवीण राठी, बिमला हुड्डा, लक्ष्मी सहवाग, सीमा राठी, मोनिका राठी, गुरदेव राठी, रमिता चुघ, रमन यादव, रेखा दलाल, अनीता कबलाना, मोनिका गर्ग, नीना राठी व शशि कुमार ने कहा कि एनजीटी के आदेशानुसार बादली रोड स्थित कूड़ा डंपिंग ग्राउंड पर कूड़े का उचित निष्पादन व निस्तारण करने का प्रावधान जब ठेकेदार को दिए गए ठेके में पहले दिन से ही है, तो यह काम ठेकेदार से क्यों नहीं करवाया जा रहा। एनजीटी के आदेशानुसार रूल 2016 के तहत यूजर चार्ज लगाने के प्रस्ताव पर पार्षदों ने कड़ा एतराज व्यक्त करते हुए कहा कि जब ठेकेदार को छोड़े गए ठेके की शर्तों में हर घर से कूड़ा उठाने का प्रावधान है तो फिर उससे कूड़ा उठवाया क्यों नहीं जा रहा और इसके लिए जनता से पैसे वसूलना पूरी तरह अनुचित है। पार्षदों ने सवाल उठाए हैं कि जब नगर परिषद ने हर घर तथा सार्वजनिक स्थानों से कूड़ा उठाकर डंपिंग ग्राउंड पर छोड़ने का ठेका दे रखा है तो फिर ये रैग पिकर्स शहर में कैसे कार्यरत हैं। बल्क वेस्ट जनरेटर को चिह्नित करके कार्रवाई करने में नप सक्षम है, फिर भी इसे बैठक में रखने का औचित्य समझ से परे है। पार्षदों का कहना है कि जब अमृत योजना के तहत शहर के लगभग हर क्षेत्र में सीवरेज लाइन बिछाने का टेंडर करने के बाद काम शुरू हो चुका है तो फिर सेप्टिक टैंकों का निर्माण करने की बजाय वहां सीवर लाइन क्यों नहीं बिछाई जा रही। सेक्टरों में सफाई के पुराने टेंडर की नियम शर्तों के साथ गत तीन वर्षों में किए गए भुगतान का माहवार ब्योरा मांगा है। सेक्टरों में स्ट्रीट लाइट रिप्लेसमेंट के बारे में जानकारी मांगते हुए कहा कि जब शहर में पुरानी लाइटें रिप्लेस कर दी गई हैं और नई लाइटों की खरीद के साथ कई सालों की मेंटेनेंस का प्रावधान है तो फिर मेंटेनेंस का ठेका दोबारा क्यों छोड़ा जा रहा है। स्ट्रीट लाइट मीट्रिंग व अलग से लाइन बिछाने, सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट के अलावा स्पीड ब्रेकरों पर आए खर्च और ट्रैफिक लाइटों बारे में जानकारी मांगी है। मॉडर्न स्लाटर हाउस से लेकर विज्ञापन ठेके का विवरण मांगा है। इसके अलावा गत तीन वर्षों में विकास कार्यों पर वार्ड वार हुए खर्च का विवरण भी पार्षदों ने देने की मांग की है। उनका कहना है कि जब प्लास्टिक बैन है तो इसके लिए नियमित चालान काटे जाने चाहिए। पहले से ही यह काम कर रही सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहित कर कपड़े के बैग वितरित करवाए जाएं। उनका कहना है कि जब नगर परिषद में स्थायी रूप से लैंड ऑफिसर नियुक्त है तो कानूनगो व पटवारी किसलिए चाहिए। विभिन्न केसों में वकील को भारी भरकम फीस देने के बाद भी स्थायी विधि सलाहकार की नियुक्ति उनकी समझ से बाहर है। किराये की गाड़ियों के भुगतान से लेकर आउटसोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों की अदायगी बारे सवाल उठाए हैं। पार्षदों ने पहले भी मोबाइल टॉयलेट खरीद व किराए को लेकर जानकारी मांगी है। स्ट्रे डॉग्स के स्टेयरलाइजेशन, बंदर पकड़ने, स्ट्रे कैटल टैंडर व सूअर पकड़ने को लेकर भी पार्षदों ने प्रश्न पूछे हैं। उनके अनुसार मृत पशुओं को उठाने का प्रावधान सफाई ठेके में पहले से ही है, तो फिर अलग से टेंडर का औचित्य क्या है। मेकैनिकल सफाई मशीन की खरीदारी निदेशालय के इस आदेश की प्रति मांगते हुए पूछा है कि जब सफाई का जिम्मा ठेकेदार का है और उसमें मशीन उल्लेखित है तो फिर मशीन खरीद का औचित्य क्या है। उन्होंने अमरूत योजना को लेकर भी पूरा विवरण मांगा है। डीजल पंप खरीदने व किराए पर लेने से लेकर संपत्ति कर बिलों के टेंडर को लेकर भी लिखित जानकारी मांगी है। नगर परिषद की संपत्ति की दोबारा पैमाइश करवाने का उद्देश्य पूछा है। पहले भी बोर्ड में जेसीबी खरीद का प्रस्ताव पारित होने के बारे में जानकारी मांगी है। एनजीटी के आदेशों की प्रति मांगने के अलावा पोर्टो केबिन के संबंध में भी जानकारी मांगी है। सफाई कर्मचारियों के लिए अब तक खरीदे गए सुरक्षा उपकरण व सामान का विवरण भी मांगा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत आईईसी एक्टीविटी के अलावा मेटिरियल रिकवरी सेंटर के निर्माण बारे जानकारी मांगी गई है। कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट के उचित निष्पादन के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। दमकल और सीएफसी केंद्र को लेकर भी प्रश्न उठाए गए हैं। रेन हार्वेस्टिंग को लेकर एनजीटी के आदेशों की प्रतिलिपि मांगी है। गत पांच वर्षों में नगर परिषद द्वारा खरीदी गई फॉगिंग मशीनों का विवरण व उन पर आए खर्च का ब्योरा भी मांगा है। वेबसाइट के लिए आईटी प्रोफेशनल, मेडिकल बिलों तथा स्वतंत्रता दिवस आयोजन के बिलों की अदायगी बारे में सवाल पूछे हैं। कोर्ट केसों की पैरवी से लेकर हरपथ को लेकर हुए भुगतान पर सवाल पूछे हैं।