बहादुरगढ़। विधानसभा चुनाव की चर्चा शहर में सभी जगहों पर सुनी जा सकती है। उसी क्रम में शहर में हुक्का पीते कुछ बुजुर्गों को भी अपने तजुर्बे बयां करते सुना जा सकता है। निजामपुर रोड पर एक कार्यालय पर कुछ बुजुर्ग और युवा चुनावी चर्चा में मशगूल थे। सभी अपनी-अपनी राय दे रहे थे। कुछ बिना किसी उम्मीदवार का समर्थन करते अपना पक्ष रख रहे थे। लोगों ने कहा कि वैसे तो चुनाव महापर्व पर चर्चा तो हर किसी की जुबान पर होती है। पार्टी समर्थक बुजुर्ग तर्क और अपनी पार्टी नेताओं के काम को गिनवाने में पीछे नहीं हट रहे थे। चर्चा के दौरान निकलकर आया कि भाई बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि बस पूछो मत सरकार बेरा न के कर कै मानेगी।
वहीं, हुक्का पी रहे कुछ लोगों का कहना था कि वह पार्टी नहीं प्रत्याशी व प्रत्याशी के काम और नीयत को देखकर ही वोट करेंगे। उन्होंने कहा कि अबकी बार बहादुरगढ़ में चुनावी समीकरण अलग हैं। पार्टी प्रत्याशियों के साथ-साथ एक निर्दलीय प्रत्याशी भी ताल ठोके हुए हैं। परनाला गांव निवासी प्रेम राठी ने कहा कि अगर उन्हें कोई भी प्रत्याशी सही नहीं लगा तो वह नोटा दबाकर लोकतंत्र के महापर्व में अपना कर्तव्य निभाएंगे। बुजुर्गों का कहना है कि हम पार्टी नहीं प्रत्याशी देखकर वोट करेंगे जो हमारी समस्याओं को हल करेगा और पहले किस प्रत्याशी ने शहर में कितने काम करवाए, यह देखकर वोट करेंगे। वहां बैठे बुजुर्ग नेताओं के काम करवाने के तरीकों और उनके व्यवहार को देखकर भी आंकलन कर रहे हैं। कुछ लोग नेताओं की रैली में भीड़ के हिसाब से भी हार जीत का आंकलन कर रहे हैं।