दिवाली के दो दिन बाद यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भैयादूज का त्योहार मनाया जाता है। इस साल भैया दूज मनाने के लिए सही तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्य ने कहा कि भैया दूज पर्व दो दिन 14 और 15 नवंबर को मनाया जाएगा।
शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया तिथि की शुरुआत 14 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 36 मिनट से शुरु हो रही है। इसका समापन 15 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 47 मिनट पर होगा। इसी वजह से यह पर्व दो दिनों तक मनाया जाएगा। रक्षाबंधन की तरह भैया दूज पर्व भी भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है।
भैया दूज के दिन भाई को तिलक लगाने का सबसे अधिक महत्व होता है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से भाई का टीका करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह प्रथा सदियों पुरानी है। ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि पंचांग के अनुसार 14 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 36 मिनट से भैया दूज पर शोभन योग भी बन रहा है, जिसे शुभ फलदायी माना गया है।
हिंदू धर्म में त्योहार उदया तिथि पर भी मनाया जाता है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार भैया दूज का पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भाई को टीका करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक है। बाकी 1 बजकर 47 मिनट तक भैयादूर मनाने के योग हैं।