झज्जर निकलने से पहले मुकुल ने निशांत के घर पर कहा कि जल्द दोस्त निशांत भी एयरफोर्स की वर्दी पहनेगा। परिवार को भी उम्मीद थी कि तीनों दोस्त अपने सपने पूरे करेंगे और देश सेवा का मौका पाएंगे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर निशांत और मुकुल का आखिरी सफर साबित होगा। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। जिस वर्दी को पहनने का सपना तीनों ने देखा था, वह सपना अधूरा रह गया।