बहादुरगढ़। आतिशबाजी के साथ हवाओं के बदले रुख ने बहादुरगढ़ में प्रदूषण को बढ़ा दिया है। सुबह के समय धुंध छाने लगी है। कूड़े के ढेर में आग लगाई जा रही है। साथ ही निर्माणाधीन साइटों के बाहर खुले में निर्माण सामग्री खुले में पड़ी है। उन्हें ढकने के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। सरेआम कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
संबंधित विभाग इस दिशा में कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को एक्यूआई 300 के नजदीक रहा। चिकित्सकों ने भी बीमार लोगों से इस मौसम में खुले में न घूमने की सलाह दी है। ग्रैप-2 लागू हो गया है। दिवाली के केवल आठ दिन ही इसमें बाकी रह गए हैं। प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। यही हाल रहता है तो दिवाली पर्व पर एक्यूआई किस स्थिति में पहुंचेगा, इसका अंदाजा लगाना बेहद आसान है। यह स्थिति दशहरा और करवाचौथ पर हुई आतिशबाजी के बाद बनी है। शहर की सड़कों के किनारे और बाईपास पर जगह-जगह कूड़ा जलाया जा रहा है। इससे न केवल लोगों को परेशानी हो रही है बल्कि प्रदूषण भी खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार को भी शहर में कई स्थानों पर यह स्थिति देखने को मिली।
गै्रप-2 में ये लगी बंदिशें
-गाड़ियों की पार्किंग चार्ज को बढ़ाया गया है।
-सीएनजी, इलेक्ट्रिक बसें और मेट्रो की फ्रीक्वेेंसी बढ़ेेंगी।
-आरडब्ल्यूए अनिवार्य रूप से अपने सिक्योरिटी स्टाफ को इलेक्ट्रिक हीटर देगी। ताकि वह आग न जलाएं।
-नॉन पीक ऑवर में कम से कम एक दिन छोड़कर पानी के छिड़काव के साथ डस्ट सपरेसमेंट (धूल बिठाने वाला केमिकल का छिड़़काव हो)
लोगों के लि सिटिजन चार्टर
-पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेें और निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करें।
-अपनी गाड़ियों के एयर फिल्टर को समय-समय पर बदलें।
-जाम से बचने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। जाम से बचने के लिए थोड़ा लंबा रास्ता भी ले सकते हैं।
-अक्तूबर से जनवरी तक धूल से जुड़ी कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी न करें।
-खुले में कूड़ा जलाने और बायोमास बर्निंग न करें।