बहादुरगढ़। शहर के चारों जैन मंदिरों में 10 दिवसीय पर्यूषण पर कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। दशलक्षण के तीसरे दिन पर्व धार्मिक प्रभावना के साथ जैन मंदिरों में सुबह 6 बजे से लेकर 10 बजे तक श्रीजी का पूजन, शांतिधारा, अभिषेक प्रारंभ हो जाता है और शाम के समय रोजाना मंदिरों में आरती व भजन कीर्तन होता है। बुधवार को पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म का पालन किया गया और इसके बारे में बताया गया।
अनाजमंडी पांडुशिला पर भी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना और अभिषेक किया। जैन समाज के प्रधान सुनील जैन ने बताया, पर्यूषण महापर्व जैन धर्मावलंबियों का आध्यात्मिक पर्व है। यह पर्व मैत्री व शांति का पर्व है। यह पर्व अपने आप में क्षमा का पर्व है। इसलिए जिस किसी से भी आपका बैरभाव है उससे शुद्ध हृदय से क्षमा मांगकर मैत्रीपूर्ण व्यवहार करें। भारतीय संस्कृति का मूल आधार तप, त्याग और संयम है। यह पर्व सिखाता है कि धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि की प्राप्ति में ज्ञान व भक्ति के साथ सद्भावना का होना भी अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म में 10 दिवसीय पर्युषण पर्व एक ऐसा पर्व है तो उत्तम क्षमा से शुरू होता है क्षमावाणी पर ही इसका समापन होता है। उत्तम आर्जव धर्म के बारे में उन्होंने बताया कि मन क्रम वचन के साथ होने पर ही उत्तम आर्जव धर्म फलित होता है। जीवन जीने के दो तरीके हैं। पहला सरलता और दूसरा छल कपट का, शांति तो साधना से ही मिलेगी।
जैन समाज के प्रवक्ता दीपक जैन ने उत्तम आर्जव धर्म के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में सरलता आना ही उत्तम आर्जव है। उत्तम आर्जव धर्म, मोह-माया का त्याग करने और आत्मा में निर्मलता का भाव उत्पन्न करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह मन को शांति प्रदान करता है और मन में द्वेष भावना व कुविचारों से मुक्ति के लिए सशक्त माध्यम है।
-फोटो 51 : शहर के दिगंबर जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते समाज के लोग।