साल्हावास। क्षेत्र के गांव बिरोहड निवासी पहलवान अमन सहरावत ने वीरवार को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में आर्यन सियुट्रिन को तकनीकी दक्षता के आधार पर 14-4 से हराकर बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज के फाइनल में जगह बनाई।
इस टूर्नामेंट से अमन को अपनी रैंकिंग में सुधार करने का मौका मिलेगा, इससे वह पेरिस ओलंपिक में बेहतर ड्रॉ हासिल कर पाएंगे। पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले एकमात्र भारतीय पुरुष पहलवान अमन स्वर्ण पदक के मुकाबले में जापान के विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता जापान के रेइ हिगुची से भिड़ेंगे।
बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज को पोलयाक इमरे एवं वार्गा जेनोस स्मृति टूर्नामेंट के नाम से भी जाना जाता है। अमन सहरावत के भाई राकेश सहरावत ने बताया कि वह तीन बार भारत कुमार रह चुके हैं। अमन सहरावत का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल बिरड़ से प्राप्त की। 20 वर्षीय अमन को जब परिजनों ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में भेजने की योजना बनाई, तब दिल्ली जाने से 6 महीने पूर्व उनकी माता का निधन हो गया और दिल्ली जाने के 6 महीने बाद उनके पिता का निधन हो गया था।
वह फिलहाल छत्रसाल स्टेडियम दिल्ली में सतपाल महाबली पहलवान से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में रेलवे विभाग में यात्रा टिकट परीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। अमन सहरावत का परिवार बिल्कुल साधारण परिवार है। वह किसान परिवार से संबंध रखते हैं। माता-पिता के निधन के बाद अमन सहरावत की परवरिश उनके चाचा, ताऊ व दादा ने मिलकर की। अमन सहरावत की बहन पूजा फिलहाल राजस्थान यूनिवर्सिटी में बीए की छात्रा हैं। अमन की सफलता पर गांव में खुशी का माहाैल है। गांव को अपने बेटे से काफी उम्म्ीद जगी है।
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