साल्हावास। बहू-चरखी दादरी मार्ग पर बसे गांव खोरड़ा पर टूटी 600 मीटर सड़क परेशानी का सबब बनी थी। दो जिलों की जोड़ने वाली इस सड़क को बनवाने के लिए किसानों की जमीन अधिगृहित करने के संबंध में फाइल लोकनिर्माण विभाग के मुख्यालय में अटकी थी। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद विभाग ने इसका संज्ञान लिया और लोकनिर्माण विभाग को सरकार ने खोरडा गांव में जमीन अधिग्रहण के लिए 76.45 लाख की प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही जमीन अधिग्रहण कर जमीन मालिकों को मुआवजा मिल जाएगा और फरवरी माह के अंत तक सड़क पर कार्य शुरू हो जाएगा।
इस मुद्दे को अमर उजाला ने समाचार पत्र में 7 जनवरी के अंक में छह साल से ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनी 600 मीटर सडक शीर्षक से प्रमुखता से उठाया गया था। जमीन मालिकों को मुआवजा न मिलने के कारण इस सड़क पर निर्माण कार्य नहीं हो रहा था। अब इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता आशीष मोर ने बताया कि अब जैसे ही पटवारियों की हड़ताल के बाद आगे कि कार्रवाई तत्परता से अमल में लाई जाएंगी। पार्षद शिवकुमार खोरडा ने बताया कि इस सड़क के मामले में 2018 में जिला न्यायालय फैसला दे चुका है और जमीन मालिकों को मुआवजा दिए जाने के भी आदेश जारी हो चुके हैं लेकिन लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय में फाइल अटकी हुई थी। वे स्वयं दो से तीन बार इसके लिए मुख्यालय में चक्कर लगा चुके हैं। सरकार के नुमाइंदों से मिल चुके थे। पक्ष विपक्ष के जनप्रतिनिधि मौका मुआयना कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। विभाग की उदासीनता के चलते लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। लोक निर्माण विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लिया खोरडा गांव में जमीन अधिग्रहण के लिए 76.45 लाख की प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। खोरडा गांव में टूटी 600 मीटर सड़क के कारण आए दिन हादसे हो रहें हैं। स्थानीय लोगों को कहना है कि रात्रि के समय यहां गाड़ी खराब हो जाती है और लोग मदद के लिए ग्रामीणों के दरवाजे खटखटाते हैं।
सडक पर हो गए चार फीट गहरे गड्ढे
राहगीरों को 600 मीटर टूटी सड़क पर भरे गंदे पानी से लोगों को गुजरना पड़ता है। अतर सिंह, पारस पंडित, सतीश, उमेश, वेदप्रकाश, मंजीत पहलवान भान, प्रदीप ने बताया कि 600 मीटर के खराब टुकड़े के कारण गांव की मुख्य फिरनी की हालत भी खस्ता गई है। 600 मीटर सड़क के टुकड़े में 3-4 फीट के गहरे गड्ढों की वजह से लोगों का आवागमन लगभग बंद हो गया है।
ओवरलोडिंग वाहन बने परेशानी का सबब
ओवरलोडिंग वाहनों के गुजरने से बिजली के खंभे लगातार टूट रहें हैं तथा लोगों के आवागमन पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि 2010 तक यह सड़क सही हालत में थी, लेकिन पिछले 13 वर्षों से इसकी हालत खस्ता हो चुकी है। एनटीपीसी झाड़ली व चरखी दादरी, रेवाड़ी की तरफ जाने वाले ओवर लोड वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं।
वर्जन
सरकार ने खोरडा गांव में जमीन अधिग्रहण के लिए 76.45 लाख की प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। जैसे ही पटवारियों की हड़ताल खत्म होगी। उसके बाद आगे की कार्यवाही तत्परता से अमल में लाई जाएंगी।
आशीष मोर, कनिष्ठ अभियंता, लोक निर्माण विभाग, झज्जर