अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। गांव रईया में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के रीजनल सेंटर के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे किसान नेता प्रदीप धनखड़ की हालत बिगड़ गई। प्रदीप धनखड़ को की चिंताजनक हालत को देखते हुए उन्हें बहादुरगढ़ के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहीं धरना स्थल पर किसानों ने प्रार्थना सभा कर किसान नेता के जल्द स्वस्थ होने के लिए कामना की। प्रतिनिधिमंडल ने एक टीम बहादुरगढ़ रवाना कर स्थिति का जायजा लिया। रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी फोन पर उनका हाल चाल पूछा और जल्द मुलाकात की बात कही। इसके बावजूद किसानों ने भूख हड़ताल जारी रखी। विवादास्पद लीज डील रद्द करने के लिए किसानों ने अलग से मुकदमा दायर करने का फैसला लिया है, जिसमें विश्वविद्यालय कुलपति स्थानीय प्रशासन दोषी सरपंच को पार्टी बनाया गया है। वहीं 13 जनवरी को होने वाली धनखड़ पंचायत को धरने पर बैठे किसानों ने 36 बिरादरी के भाईचारे और धनखड़ खाप को कमजोर करने के लिए षड्यंत्र करार दिया है। किसानों ने प्रदेश में हो रही शामलात भूमि घोटालों की जांच और दादरी में कृषि मंत्री पर अवैध खनन में भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ रहे राजपत्रित अधिकारी प्रदीप कासनी का भी धरना स्थल पर समर्थन किया। किसानों ने कहा कि कुलपति ने कहीं भी प्रभावित भू मालिकाओ को नए भूमि अर्जन कानून 2013 के तहत कलेक्ट्रेट पर चार गुना मुआवजा और प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को स्थायी रोजगार के लिए कोई भी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए हैं।