लगातार चल रही शीत लहर ने मैदानी इलाकों में ठंड का प्रकोप बढ़ा दिया है। बुधवार को पड़ी कड़ाके की ठंड ने पिछले 7 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग के अधिकारियों की माने तो इससे पहले वर्ष 2013 में दिसंबर के महीने में 2.4 डिग्री, 2018 में 2.6 डिग्री तो वर्ष 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा था। वर्ष 2020 में दिसंबर के तीसरे सप्ताह में ही तापमान ने 7 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 2 डिग्री पर पहुंच गया। अधिकारियों का कहना है कि अगले बुधवार को शीत लहर का प्रभाव और बढ़ेगा। अगले तीन दिनों तक ठंड से राहत की संभावना नहीं है। दिन के समय भी बर्फीली हवाएं लगातार चलती रहेंगी और लोगों के लिए मुसीबत बनेगी। उनका कहना है कि दिसंबर के अंत तक तापमान इससे भी नीचे जा सकता है।