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भक्ति के बिना मनुष्य जीवन शून्य: आचार्य गौरव

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झज्जर। गांव जैतपुर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान चंद्रभान सिंह एवं उनकी पत्नी प्रेम देवी ने अपने पुत्र राकेश सिंह एवं पुत्रवधू सतीश देवी के साथ देवताओं का पूजन एवं भागवत भगवान की आरती की। वीरवार को कथा करते हुए आचार्य गौरव दीक्षित राधे राधे महाराज ने बताया कि मनुष्य के जीवन में सर्वोपरि अगर कुछ है तो वह भक्ति हुआ करती हैं। भक्ति के बिना जीव का कोई अस्तित्व नहीं होता। नारद जी महाराज के पूर्व जन्म की कथा का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य गौरव दीक्षित ने कहा कि नारद जी पूर्व जन्म में एक दासी के पुत्र थे। अल्प अवस्था में ही नारद जी की मां को एक विषैले सर्प ने डस लिया। उसके बाद अल्प आयु के नारद जी महाराज ने भक्ति को सर्वोपरि मानकर अपने आप को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। उस भक्ति के प्रभाव से नारद जी को प्रभु का ही स्वरूप प्राप्त हो गया। आचार्य गौरव दीक्षित ने कहा कि भक्ति के प्रभाव का इससे बड़ा उदाहरण कोई नहीं हो सकता। उसके उपरांत कथा के विश्राम में ध्रुव चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्य दीक्षित ने कहा कि भक्ति के प्रभाव से ही ध्रुव जी महाराज ने मात्र 5 वर्ष की आयु में अकारण, करुणा, वरुणालय, भक्तवान्क्षा, कलपतरु, अज, अच्युत, अजन्मा भगवान नारायण की कृपा को सहजता में प्राप्त कर लिया। आज की कथा में हवा सिंह, राज सिंह, बलराज सिंह, सतवीर सिंह, राकेश सिंह वेद प्रकाश, ओम प्रकाश, सुरेश सिंह, रमेश, दिनेश, दीपक सांगवान, कृष्ण सांगवान, मोहन सांगवान, राहुल सांगवान, प्रदीप, मोनू, अजय, क्रिश, सरिता देवी, सुमित्रा देवी, ज्योति, आइशा, सपना, ज्योति, तनु, मुस्कान, नेहा, नीरू, मंजू, मंसू, निशा, रंजना, सुदेश सहित सैकड़ों भक्तों ने कथा का रसास्वादन भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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