अहंकार मानव के सद्गुणों का कर देता है लोप : साध्वी अक्षिता
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मानव जीवन व सोच का अगर कोई सबसे बड़ा विरोधी है तो वह है स्वयं मनुष्य का अहंकार है। यह एक ऐसा भाव है जो अगर अंतर में रोपित हो जाए तो मनुष्य के सभी सद्गुणों का लोप हो जाता है और केवल विनाश की राह ही उसके सामने बच जाती है। हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हमारे दैनिक कर्म में चाहे कितना भी बड़ा कार्य न कर लें इस भाव को कभी भी अपने ऊपर हावी न होने दें। जैन महासाध्वियों शक्ति प्रभा, अक्षिता व रक्षिता ने नगर के विहार की विदाई के दौरान जैन समाज के नागरिकों को संबोधित किया। गौरतलब है कि ये तीनों साध्वियां धर्म प्रचार-प्रसार के लिए पिछले कुछ दिनों से नगर के छोटी बजारी स्थित जैन स्थानक में प्रवास पर थीं। वीरवार को वे दूसरे स्थान पर धर्म प्रचार-प्रसार के लिए प्रस्थान कर गईं। इस दौरान जैन समाज के नागरिकों ने उनको नगर सीमा तक विदाई दी। जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य इंद्र जैन ने बताया कि अब ये तीनों महासाध्वियां दादरी से पैदल यात्रा कर सिरसा के रानिया क्षेत्र में धर्म प्रचार व दीक्षा समारोह के लिए रवाना हो गई हैं। जैन साध्वियों ने कहा कि अहंकार एक ऐसा भाव है जो कि धनी से धनी व गुणवान से गुणवान मानव को भी अंतत ऐसे पतन की राह पर ले जाता है जिस पर चलकर उसे केवल पछताना ही पड़ता है। आज तक का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां कि बलवान से बलवान व्यक्ति भी आखिर में केवल अपने इसी दुगुर्ण के चलते न सिर्फ अपनी ख्याति को खो बैठा बल्कि आज उनका नाम केवल उनके बुरे कर्मों के चलते ही याद किया जाता है। इसलिए कभी भी इस भाव को अपने अंतर्मन पर हावी न होने दे। इस अवसर पर मास्टर जगदीश जैन, एनके जैन, मुकेश जैन, आईसी जैन, पंकज जैन, बिमल जैन, रणजीत जैन, छोटू जैन, टीनू जैन, लक्की जैन, हैप्पी जैन, संदीप जैन, सुरेंद्र मोहन जैन, तमन्ना जैन, राशी जैन, मंजू जैन, नैना जैन, गायित्री वर्मा, सरोज जैन, आरती जैन, कशिश जैन, वंशिका जैन, सिद्धी जैन, युग जैन, मौलिक जैन, धीरज जैन, मीना जैन, पोपटी जैन, अभय जैन, निर्मला जैन, रमेश जैन, सुरेश जैन आदि उपस्थित थे।