अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। इलाके में 20 मार्च को होलिका दहन धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दौरान मंदिरों में सत्संग-कीर्तन होंगे और शहर के कई हिस्सों में होली पूजन किया जाएगा। पुराने शहर में सरकारी स्कूल के पास स्थित वाल्मीकि मोहल्ला चौक (बोड़ा कुआं) पर हरियाणवी गीतों और ढोल की थाप पर होलिका दहन होगा। बहादुरगढ़ में सबसे पहले इसी स्थान पर होली पूजन एवं होलिका दहन हुआ था। शहर में झज्जर रोड के समीप वाल्मीकि मोहल्ला चौक है। इस चौक को बोड़ा कुआं चौक के नाम से भी जाना जाता है। जब बहादुरगढ़ शहर बसा तो सबसे पहले इसी स्थान पर होली पूजन और होलिका दहन किया गया था। आज भी इस जगह परंपरागत ढंग से होलिका दहन की जाती है। सवा महीने पहले बसंत पंचमी पर होलिका दहन स्थल पर डंडा गाड़ा जाता है। फाग से पहले होली वाले दिन सुबह से दोपहर तक यहां महिलाएं, बच्चे व बड़े होली पूजन करते हैं। यहां के बुजुर्ग सूरजभान ने बताया कि इस स्थान पर होली पूजन का सिलसिला जब शुरू हुआ तो इसकी शुरुआत एक ब्राह्मण ने की थी। उसके बाद वाल्मीकि समाज के लोगों ने करीब 250 साल पुरानी इस परंपरा को आगे बढ़ाया। समाज के सभी वर्गों के युवा व किशोर डंडा गाड़ने के बाद दूर-दराज से कीकर और अन्य सूखे पेड़ों की लकड़ियां डंडे पर डाल देते हैं और इसके बाद आसपास के लोग ही इसकी देखभाल करते हैं। यहां पर इमली वाली गली, व्यास कॉलोनी, मस्जिद मोहल्ला, बांबे वाली गली, भगतों वाला मोहल्ला, उत्तम नगर, जटवाड़ा, मांडोठी बाजार, किला मोहल्ला, गौगोरा, झील मोहल्ला, जैन मंदिर, खटीक मोहल्ला सहित कई अन्य कॉलोनियों के लोग यहां एक साथ पूजा करते हैं। बुजुर्ग महिला भतेरी ने बताया कि त्योहार मनाने के तौर तरीके तो कहीं हद तक बदल गए हैं। पहले इस स्थान पर महिलाएं पूजन करती थी तो व्यक्ति ढोल की थाप पर नाचते-गाते थे। बेशक वे पुराने तौर तरीके तो नहीं रहे लेकिन इस बात की खुशी भी है कि कम से कम लोग जात-पात को भूलकर एक साथ होली तो मना ही रहे हैं।