जिले में नशे का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है। शहर की कई कॉलोनियों और साथ लगते कई गांवों में नशा खुलेआम बिक रहा है। चिट्टे का नशा युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। चिट्टे के कारण कई परिवार उजड़ चुके हैं और 284 युवा नशा छुड़वाने के लिए नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र से दवा ले रहे हैं। इनमें से अधिकतर युवा सिरिंज के जरिए नशा ले रहें है। हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा जिले में नशे के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है। उसके बाद भी नशे का कारोबार चल रहा है।
चिट्टे का बढ़ता प्रचलन
नागरिक अस्पताल के मनोरोग चिकित्सक प्रशांत ने बताया कि युवाओं में चिट्टे का प्रचलन बढ़ रहा है। नशा छोड़ने की दवा लेने आने वाले अधिकतर युवा सिरिंज के जरिए नशा ले रहे हैं। एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल करने से नशे की लत के साथ उनको बीमारियां भी हो रही हैं। जिसके कारण एड्स और काला पीलिया के रोगी मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर महीने नशा करने वालों की तादात बढ़ रही है। अगस्त महीने में 284 युवा दवा लेने के लिए अस्पताल में आ रहे हैं। नशा करने के कारण युवाओं का दिमागी संतुलन तो बिगड़ रहा है साथ ही अपराध भी बढ़ रहा है। चिट्टे का नशा महंगा है और एक बार लत लग जाए तो आसानी से नहीं छुटता। नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा अपराध कर रहे हैं।
केस 1
पिछले सप्ताह जीजेयू के सामने झाड़ियों में एक युवक का शव मिला था। उसके पास से नशे की सिरिंज बरामद हुई थी। मृतक मस्तनाथ कॉलोनी का रहने वाला 32 वर्षीय संदीप था। संदीप की मौत भी नशे की ओवरडोज के कारण हुई थी। सदर थाना पुलिस ने मृतक के परिजनों के बयान पर अज्ञात के खिलाफ गैर इरादत्ततन हत्या का केस दर्ज किया था। पोस्टमार्टम में मौत का कारण नशे की ओवरडोज आया था।
केस 2
31 जुलाई की रात को नागरिक अस्पताल के शौचालय से एक युवक का शव बरामद हुआ था। नशे की ओवरडोज के कारण युवक की मौत हुई थी। हाथ के अंदर सिरिंज लगी हुई मिली थी। युवक की पहचान कोहली निवासी सचिन के रूप में हुई थी। देर रात को युवक अस्पताल पहुंचा और सिरिंज लेकर शौचालय में गया था इसके बाद उसने नशे का इंजेक्शन लगा लिया था और नशे की डोज ज्यादा होने के कारण उसकी मौत हो गई थी।
अस्पताल में दवा लेने वाले युवा
माह संख्या
जनवरी 123
फरवरी 131
मार्च 142
अप्रैल 145
मई 161
जून 194
जुलाई 245
अगस्त 284