नागरिक अस्पताल में छोटी व बड़ी एक्सरे मशीनें
हांसी। शहर के नागरिक अस्पताल में एक एक्सरे मशीन चार साल से खराब पड़ी है। मजबूरी में स्टाफ को छोटी एक्सरे मशीन से ही क्षमता से ज्यादा एक्सरे करने पड़ रहे हैं। स्टाफ की मानें तो क्षमता से अधिक काम लेने पर छोटी एक्सरे मशीन की ट्यूब हेड फटने का खतरा बना रहता है, जिससे मरीजों के साथ स्टाफ को भी नुकसान हो सकता है।
बता दें कि नागरिक अस्पताल में दो एक्सरे मशीन हैं। दोनों मशीनें करीब 15 वर्ष पुरानी हैं। चार साल पहले 300 एमए की बड़ी एक्सरे मशीन खराब हो गई थी, जो आज तक ठीक नहीं करवाई गई। अब 100 एमए एक्सरे मशीन से ही काम चलाया जा रहा है। हालांकि नागरिक अस्पताल के स्टाफ का कहना है कि उन्हें 500 एमए एक्सरे मशीन की जरूरत है। इसे लेकर वह कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिख चुके हैं।
छोटी मशीन से किए जा रहे प्रतिदिन 40-50 एक्सरे
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 एक्सरे किए जाते हैं चूंकि बड़ी मशीन खराब है तो छोटी मशीन से ही एक्सरे किए जा रहे हैं। हालांकि इस मशीन की क्षमता इतनी नहीं है। क्षमता से ज्यादा एक्सरे करने के कारण हर समय मशीन की ट्यूब हेड फटने का खतरा रहता है। इसके अलावा यह मशीन काफी पुरानी है, जिस कारण से यह अनियंत्रित रेडियो विकिरण भी छोड़ती है जो मरीजों के साथ-साथ स्टाफ के लिए भी खतरनाक है। एईआरबी (एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड) के नियमों पर भी ये मशीनें खरी नहीं उतरतीं। ऐसे में इन पुरानी एक्सरे मशीन से मरीजों की जांच कर उनके स्वास्थ्य को खतरे में डाला जा रहा है।
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असुरक्षित रेडियोलॉजी कक्ष से खतरा
नागरिक अस्पताल के ग्रांउड फ्लोर पर स्थित रेडियोलॉजी विभाग में रेडियो विकिरणों से बचाव के लिए किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। नियमों के अनुसार अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के कमरों की दीवारों पर एक विशेष धातु की परत अनिवार्य रूप से लगानी होती है, ताकि घातक विकिरणें बाहर नुकसान न पहुंचाए।
नई एक्सरे मशीन लगाने के लिए कई बार डिमांड भेजी जा चुकी है। वर्तमान में हमारे पास दो मशीनें हैं, जिसमें से 300 एमए की मशीन खराब पड़ी हुई है जबकि 100 एमए की छोटी मशीन से काम चलाना पड़ रहा है। हमने 500 एमए मशीन की डिमांड की हुई है। -डॉ. जसवंत कुमार, रेडियोलॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल