मौसम का मिजाज बदलने और आसमान में काले बादल छाने के साथ हुई गोहाना में बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज हवा और बूंदाबांदी से खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान होने का अंदेशा है। वहीं, बारिश होने पर मंडियों में पहुंची धान की फसल भी भीग सकती है।
धान की फसल पककर तैयार होने के कारण किसान इन दिनों कटाई और उपज को मंडियों तक पहुंचाने में जुटे हैं। ऐसे में वीरवार सुबह अचानक मौसम में आए बदलाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। तेज हवा से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने का डर है, जबकि बारिश होने पर मंडियों में खुले में रखी धान की उपज प्रभावित हो सकती है। किसानों को खेतों से लेकर मंडियों तक फसल की सुरक्षा की चिंता सता रही है। यदि मौसम और बिगड़ता है तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
सरकारी व प्रशासनिक तौर पर बरती जा रही ढील के चलते जिले भर में करोड़ों रुपए का धान फिर बारिश में भीग गया। पिछले करीब 2 घंटे से और रुक-रुक कर बारिश हो रही है। अनाज मंडियों में लाखों मैट्रिक टन धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। जिसमें से कुछ धान को तिरपाल से ढका जा सकता तो बड़ी मात्रा में बारिश में भीग रहा है।
अनाज मंडी में पानी निकासी समुचित में होने के चलते धान की दरी के नीचे से पानी बहने लगा। चार दिन पहले हुई बारिश व उसमें धान भीगने से हुए नुकसान से भी प्रशासन सबक नहीं ले पाया। अनाज मंडियों में धान का उठान उम्मीद अनुसार तेज नहीं हो पाया जिसके चलते आज फिर मौसम में हुआ बदलाव के बाद बड़ी मात्रा में धान भीग गया। जिले भर की अनाज मंडियों में बुधवार शाम तक 4 लाख 94 हजार 499 मीट्रिक टन धान खरीद किया गया था, जिसमें से महज 55 फ़ीसदी धान का ही उठान हो पाया था। बाकी धन उठान की इंतजार में था। बुधवार को महज 14 फीसदी ही उठान हो पाया था।