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हरियाणा में मौसम का मिजाज बदला: कई जिलों में बारिश, ओलावृष्टि की संभावना; किसानों को लाखों मैट्रिक टन धान भीगा

Thu, 15 Oct 2026 09:30 AM IST
Naveen अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा

सार

टोहाना की एडिशनल अनाज मंडी में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। करीब पांच बजे से शुरू हुई तेज बारिश ने मंडी में खुले में पड़े धान को भिगो दिया। मंडी में सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान की बोरियां भी उठान न होने के कारण पानी में भीग गईं।
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हरियाणा में मौसम का मिजाज बदला - फोटो : संवाद
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विस्तार
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फतेहाबाद में अचानक बारिश ने अनाज मंडियों में खुले में रखे धान को भिगो दिया, जिससे किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है। सुबह करीब पांच बजे शुरू हुई इस बरसात ने धान की खरीद, उठान और फसल को सुरक्षित रखने की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडियों में खुले में रखी धान की ढेरियों पर पानी पड़ने से फसल को नुकसान होने की आशंका है, और किसानों को अब धान को सुखाने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की चिंता सता रही है।

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जिले में हुई बारिश के दौरान जाखल क्षेत्र में सबसे अधिक 36 एमएम बरसात दर्ज की गई। इसके अलावा टोहाना में 17 एमएम, फतेहाबाद में 10 एमएम, भुना में नौ एमएम, कुलां में छह एमएम, भट्टूकलां में पांच एमएम और रतिया में तीन एमएम बारिश हुई। इस बरसात से मौसम में ठंडक महसूस की गई।

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खुले में रखी फसल पर पड़ा बारिश का पानी
धान की खरीद के सीजन में मंडियों में बड़ी मात्रा में फसल पहुंच रही है। ऐसे में सुबह हुई बारिश ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। मंडियों में खुले में रखी धान की ढेरियों पर पानी पड़ने से नमी बढ़ने की आशंका है, जिससे फसल को सुखाने में अतिरिक्त समय लग सकता है। किसानों को डर है कि धान में नमी बढ़ने से खरीद और उठान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

बारिश से खरीद और उठान पर असर की आशंका
मंडी में धान को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल और अन्य व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है। सुबह हुई बरसात के बाद किसानों और आढ़तियों का ध्यान भीगी फसल को सुरक्षित रखने पर केंद्रित रहा। यदि मौसम साफ होने के बाद धूप निकलती है तो धान को सुखाने में मदद मिल सकती है, लेकिन लगातार बारिश होने पर परेशानी बढ़ने की आशंका है।

टोहाना में स्थिति गंभीर
टोहाना की एडिशनल अनाज मंडी में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। वीरवार सुबह करीब पांच बजे से शुरू हुई तेज बारिश ने मंडी में खुले में पड़े धान को भिगो दिया। मंडी में सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान की बोरियां भी उठान न होने के कारण पानी में भीग गईं, जिससे किसानों और आढ़तियों को भारी नुकसान की आशंका है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यवान नैन द्वारा जारी एक वीडियो में मंडी परिसर में चारों ओर पानी भरा हुआ दिखाया गया, जिसमें धान की बोरियां पानी में डूबी हुई थीं और कई जगह तिरपाल उड़ने से ढेर भीग गए थे। खुले में पड़ा धान नालियों के पानी में बहता हुआ भी नजर आया।

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सोनीपत में बूंदाबांदी और तेज हवा से किसानों की बढ़ीं धड़कनें

मौसम का मिजाज बदलने और आसमान में काले बादल छाने के साथ हुई गोहाना में बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज हवा और बूंदाबांदी से खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान होने का अंदेशा है। वहीं, बारिश होने पर मंडियों में पहुंची धान की फसल भी भीग सकती है।



धान की फसल पककर तैयार होने के कारण किसान इन दिनों कटाई और उपज को मंडियों तक पहुंचाने में जुटे हैं। ऐसे में वीरवार सुबह अचानक मौसम में आए बदलाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। तेज हवा से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने का डर है, जबकि बारिश होने पर मंडियों में खुले में रखी धान की उपज प्रभावित हो सकती है। किसानों को खेतों से लेकर मंडियों तक फसल की सुरक्षा की चिंता सता रही है। यदि मौसम और बिगड़ता है तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
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कुरुक्षेत्र में बदला मौसम, बारिश में फिर भीगा करोड़ों का धान 

सरकारी व प्रशासनिक तौर पर बरती जा रही ढील के चलते जिले भर में करोड़ों रुपए का धान फिर बारिश में भीग गया। पिछले करीब 2 घंटे से और रुक-रुक कर बारिश हो रही है। अनाज मंडियों में लाखों मैट्रिक टन धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। जिसमें से कुछ धान को तिरपाल से ढका जा सकता तो बड़ी मात्रा में बारिश में भीग रहा है।

अनाज मंडी में पानी निकासी समुचित में होने के चलते धान की दरी के नीचे से पानी बहने लगा। चार दिन पहले हुई बारिश व उसमें धान भीगने से हुए नुकसान से भी प्रशासन सबक नहीं ले पाया। अनाज मंडियों में धान का उठान उम्मीद अनुसार तेज नहीं हो पाया जिसके चलते आज फिर मौसम में हुआ बदलाव के बाद बड़ी मात्रा में धान भीग गया। जिले भर की अनाज मंडियों में बुधवार शाम तक 4 लाख 94 हजार 499 मीट्रिक टन धान खरीद किया गया था, जिसमें से महज 55 फ़ीसदी धान का ही उठान हो पाया था। बाकी धन उठान की इंतजार में था। बुधवार को महज 14 फीसदी ही उठान हो पाया था।
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